Omar Abdullah And Jammu Kashmir Political News : जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस समय दो अलग-अलग वजहों से जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पूर्व पत्रकार निधि राजदान संग तस्वीरों के सामने आने के बाद उनकी सगाई और शादी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है, वहीं दूसरी तरफ सूबे के सियासी समीकरणों में भी तनाव गहरा गया है, जहां उनकी अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 24 विधायक मंत्रिमंडल विस्तार से नाखुश होकर लामबंद हो चुके हैं।

उमर अब्दुल्ला की सोशल मीडिया पोस्ट और हाई-प्रोफाइल डिनर की चर्चा

दरअसल, सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जानी-मानी पूर्व पत्रकार निधि राजदान की कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हो रहीं। शनिवार यानी 31 अक्टूबर 2026 को उमर अब्दुल्ला ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से निधि के साथ दो तस्वीरें साझा करते हुए लिखा-कल एक नई शुरुआत हुई, निधि। उन्होंने पोस्ट में अंगूठी का इमोजी भी लगाया है। इसके सामने आते ही इंटरनेट पर दोनों के रिश्ते, सगाई और शादी को लेकर अटकलों का दौर शुरू है। वैसे, पूरे मामले पर न उमर अब्दुल्ला और न निधि राजदान ने आधिकारिक बयान जारी किया है।

31 जुलाई को पत्नी पायल से हुआ था तलाक

जानकारी के मुताबिक इस साल 31 जुलाई को उमर अब्दुल्ला का उनकी पहली पत्नी पायल के साथ कानूनी रूप से तलाक हुआ था। इस बीच चर्चा है कि शनिवार शाम को दिल्ली के पृथ्वीराज रोड स्थित जेके हाउस में बेहद खास डिनर का आयोजन किया गया है। इसके लिए 71 चुनिंदा मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। मेहमानों की इस सूची में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, रॉबर्ट वाड्रा, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में उभरी नाराजगी

राजनीतिक मोर्चे की बात करें तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के 24 विधायक मौजूदा फैसलों से असहमत नजर आ रहे हैं। इस सिलसिले में शुक्रवार को श्रीनगर स्थित लोलाब के विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में 18 विधायक खुद मौजूद रहे, जबकि 6 विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। बैठक में मौजूद विधायकों ने मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर सोगामी के साथ-साथ 27 अक्टूबर को शपथ लेने वाले चार नए मंत्रियों को पद से हटाने की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि सलाहकार सोगामी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गुमराह कर रहे हैं और संगठन के फैसलों में गैर-जरूरी दखल दे रहे। विधायक मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव की मांग कर रहे।

चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सौंपेगा मांग पत्र

अपनी आवाज नेतृत्व तक पहुंचाने के लिए विधायकों ने 4 सदस्यों की एक समिति बनाई है। इस प्रतिनिधिमंडल की कमान पार्टी के वरिष्ठ नेता और गुरेज से विधायक नजीर अहमद गुरेजी तथा थानामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान को सौंपी गई है। यह दल जल्द ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर अपना मांग पत्र सौंपेगा। विधायकों का कहना है कि वे नेतृत्व के रुख को देखने के बाद ही अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।

विधायकों ने कहा-पार्टी नहीं छोड़ेंगे

वैसे, बैठक का हिस्सा रहे विधायकों ने कहा है कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रति वफादार हैं। किसी भी सूरत में पार्टी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने साफ किया कि उनकी लड़ाई सिर्फ अंदरूनी व्यवस्था को सुधारने के लिए है। दूसरी तरफ गुरेज विधायक नजीर अहमद गुरेजी ने इस बैठक के राजनीतिक मायनों को खारिज करते हुए इसे एक सामान्य लंच मीटिंग करार दिया। उन्होंने कहा कि कैसर जमशेद लोन ने केवल दोपहर के भोजन पर बुलाया था, इसलिए इसे बगावत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

मंत्रिमंडल फेरबदल का पूरा गणित

उल्लेखनीय है कि 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को मंत्री बनाया गया था, जबकि निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा की छुट्टी कर दी गई थी। इस फेरबदल के कारण कई वरिष्ठ और दावेदार विधायक मंत्री पद की रेस से बाहर रह गए, जिनमें नजीर अहमद गुरेजी और मुबारक गुल के नाम प्रमुख थे। असंतोष को थामने के लिए बाद में फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को अली मोहम्मद सागर की जगह पार्टी का नया महासचिव नियुक्त किया था।