INDIA Bloc Mock Parliament News : नई दिल्ली स्थित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास में आज यानी 31 अक्टूबर 2026 को लोकसभा की तर्ज पर विशेष मॉक पार्लियामेंट (प्रतीकात्मक संसद) चल रही। अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार कर रहीं। इसमें कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों के दिग्गज नेता और सांसद शामिल हैं, जो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनमहाभियोग लाने के लिए अपनी-अपनी बात रख रहे। बता दें, यह कार्यक्रम मूल रूप से शुक्रवार यानी 30 अक्टूबर 2026 को होना था। मगर, झमाझम बारिश के कारण इसे टालना पड़ा था। इस दौरान खरगे ने कहा कि हमारी मांग है CEC ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाकर 2023 का कानून रद़्द किया जाए। SIR रोका जाए।
क्या होता है पब्लिक महाभियोग और पुराना इतिहास?
राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि पब्लिक महाभियोग ऐसा मंच या विरोध का तरीका है, जिसके माध्यम से जनता या राजनीतिक दल किसी संवैधानिक पद पर आसीन ऊंचे पद वाले व्यक्ति के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हैं। इससे ठीक 16 साल पहले यानी 20 अगस्त 2010 को भी लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद 70 सांसदों ने संसद के बाहर अपनी खुद की मॉक पार्लियामेंट चलाई थी। उसमें लालू प्रधानमंत्री बने थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे ने स्पीकर की कुर्सी संभाली थी। कीर्ति आजाद नेता प्रतिपक्ष बने थे। उस समय सांसदों ने मेडिकल काउंसिल संशोधन विधेयक बिना चर्चा के पारित किए जाने तथा सांसदों के वेतन भत्तों जैसे मुद्दों पर जोरदार विरोध जताया था।
मल्लिकार्जुन खरगे और मीरा कुमार के तीखे तेवर
मॉक संसद की अध्यक्षता करते हुए लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि हमारा भारतीय प्रजातंत्र पूरी तरह से समता के सिद्धांत पर टिका है। देश के हर एक वयस्क नागरिक को बिना भेदभाव वोट देने का समान अधिकार मिला हुआ है। लोकतंत्र चुनाव की ताकत से आगे बढ़ता है और इस चुनाव की असली ताकत के केंद्र में मतदाता की आत्मा बसती है। मीरा कुमार ने कहा कि पिछले कुछ साल से यह देखने को मिल रहा कि जिन योग्य नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में होने चाहिए, उनके नाम साजिश के तहत अनुचित तरीके से काटे जा रहे हैं। आपने देखा है पिछले कुछ साल में जिन्हें वोट देना चाहिए, उनके नाम वोटर लिस्ट से अनुचित ढंग से काटे जा रहे हैं। जब इंडिया ब्लॉक द्वारा इस पर सवाल उठाए जाते हैं तो चुनाव आयोग की ओर से पारदर्शिता नहीं दिखाई जाती और न कोई स्पष्ट जवाबदेही मिलती है। इसी मनमानी के खिलाफ ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए महाभियोग लाने का यह अहम फैसला लिया गया है
CEC से निजी दुश्मनी नहीं : खरगे
खरगे ने कहा कि आज से ठीक 7 महीने पहले विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में रखा था, लेकिन हमारे उन नोटिसों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया गया। उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आज हम लोकतंत्र को बचाने के लिए फिर से यह प्रस्ताव लेकर आए हैं। हमारी चुनाव आयोग (CEC) से कोई निजी दुश्मनी नहीं है।
महाराष्ट्र में गलत तरीके से वोटर लिस्ट में जोड़े 40 लाख नाम : खरगे
खरगे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां चुनाव के दौरान 40 लाख नए नाम चुपचाप जोड़ दिए गए। इससे पूरा चुनाव परिणाम ही पलट गया। SIR प्रक्रिया के दौरान सामान्य से 5 गुना ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। यह सारा काम ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मिलीभगत से किया जा रहा। कर्नाटक में भी बिल्कुल यही फॉर्मूला अपनाया गया। राहुल गांधी ने देश के सामने चुनावों में हुई गड़बड़ी का पूरा नक्शा रखा था। उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से समझाया था कि आखिर फर्जीवाड़ा कहां-कहां हुआ है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग से 18 बार आधिकारिक तौर पर जानकारी मांगी गई, लेकिन अब तक एक का भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
'वोट चोरी से सांसद चोरी तक, मोदी सरकार ने रची हर साजिश'
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सत्ता पर हर हाल में काबिज रहने के लिए कई तरह की साजिशें रची हैं। चुनावी बॉन्ड, विधायकों-सांसदों की खरीद-फरोख्त (सांसद चोरी) और अब सीधे जनता के वोटों की चोरी-इन सबके हमारे पास सैकड़ों पुख्ता उदाहरण मौजूद हैं।