चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए ऑनलाइन फॉर्म-6 से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी घोषणा को अलग कर दिया है। अब जिन राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है, वहां भी नए वोटरों को ECINet पोर्टल पर पंजीकरण के लिए Form 6 और SIR घोषणा अलग-अलग भरनी होगी। इससे पहले SIR से संबंधित घोषणा को Form 6 के भीतर शामिल किया गया था। आवेदकों के लिए इस घोषणा का जवाब देना अनिवार्य था। चुनाव आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब दो चुनाव आयुक्तों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
Form 6 में क्या बदलाव हुआ?
अब तक ऑनलाइन Form 6 में सेक्शन J और K के बीच SIR से जुड़ा एक कॉलम दिया गया था। इसमें आवेदक को तीन विकल्पों में से किसी एक को चुनना होता था:
- क्या उसका नाम पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची में शामिल था?
- क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का नाम उस सूची में दर्ज था?
- क्या न तो आवेदक और न ही उसके माता-पिता का नाम पिछली SIR वाली मतदाता सूची में था?
इस घोषणा का जवाब दिए बिना आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती थी। अब आयोग ने इसे Form 6 से अलग कर दिया है और SIR से संबंधित जानकारी के लिए अलग फॉर्म उपलब्ध कराया है।
दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
Form 6 में SIR घोषणा शामिल करने के फैसले पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जोशी ने 16 मई को कहा था कि फॉर्म में इस तरह का बदलाव करने के लिए कानूनी संशोधन जरूरी है। संधू ने 13 अगस्त को इसे अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की बात कही थी। दोनों आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद जुलाई में ऑनलाइन Form 6 में यह घोषणा शामिल कर दी गई थी। विवाद की वजह यह थी कि Form 6 का प्रारूप मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित है। इसमें संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के बाद बदला फैसला
चुनाव आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में बताया था कि उसकी इलेक्टोरल रोल डिवीजन ने 21 अक्टूबर को Form 6 और SIR घोषणा को अलग करने का निर्णय लिया था। आयोग के अनुसार, दोनों प्रक्रियाओं को एक ही फॉर्म में रखने का उद्देश्य आवेदकों की सुविधा था। अलग-अलग फॉर्म होने पर दो बार OTP और ई-सिग्नेचर की जरूरत पड़ती, जबकि एक फॉर्म से यह प्रक्रिया एक बार में पूरी हो जाती थी। हालांकि, आयोग ने माना कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घोषणा को जिस तरह Form 6 के भीतर दिखाया गया, उससे यह धारणा बन सकती थी कि निर्धारित फॉर्म में संशोधन किया गया है। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि Form 6 में संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इसके बाद दोनों प्रक्रियाओं को अलग करने का फैसला किया गया।
SIR प्रक्रिया को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
Form 6 का मामला चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया के साथ-साथ आयोग के सॉफ्टवेयर और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने हाल के हफ्तों में कई प्रक्रियाओं में बदलाव किए हैं। इनमें आयोग की बैठकों के एजेंडे और विवरण साझा करना, अधिकारियों के विदेश दौरों के लिए मंजूरी की व्यवस्था और ECINet प्लेटफॉर्म के ऑडिट के लिए समिति बनाना शामिल है। Form 6 से SIR घोषणा को अलग करने के फैसले के बाद अब नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण और SIR से जुड़ी जानकारी देने की प्रक्रिया अलग-अलग होगी।