दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग के बूथ लेवल अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होने वाले BLO App में नया बदलाव सामने आया है। ऐप में ‘Mark VIP’ नाम का एक फीचर जोड़ा गया है, जिसके जरिए BLO किसी मतदाता को VIP के तौर पर चिह्नित कर सकते हैं। यह जानकारी हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट और द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की पड़ताल में सामने आई है।

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि BLO App को 30 जुलाई को इस नए विकल्प के साथ अपडेट किया गया था। वहीं, Apple App Store के रिकॉर्ड में यह अपडेट 31 जुलाई को दर्ज हुआ और उसमें ‘mark VIP elector related changes’ का विवरण दिया गया। Android Play Store पर इस बदलाव का ऐसा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।

CEO कार्यालय ने कहा- बदलाव सीधे आयोग के स्तर से

दिल्ली CEO कार्यालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्थानीय CEO कार्यालय ऐप या उसके सॉफ्टवेयर में अपनी ओर से बदलाव नहीं कर सकता। उनके अनुसार, इस तरह के तकनीकी बदलावों से जुड़े निर्देश सीधे चुनाव आयोग की ओर से आते हैं। इस फीचर को किस वजह से जोड़ा गया और इसे लागू करने के पीछे किस नियम या अधिकार का इस्तेमाल किया गया, इस बारे में चुनाव आयोग से प्रतिक्रिया मांगी गई थी। हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार रात तक आयोग की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं मिला था।

कैसे काम करता है ‘Mark VIP’ फीचर?

द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की पड़ताल के मुताबिक, BLO App में SIR के दौरान मतदाताओं की जानकारी देखने वाले हिस्से में ‘Mark VIP’ का विकल्प दिखाई देता है। BLO किसी मतदाता को इस विकल्प के जरिए VIP के तौर पर चिह्नित कर सकता है। इसके बाद यह सिफारिश आगे के अधिकारियों के सत्यापन के लिए भेजी जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ चुनाव अधिकारियों और BLOs को VIP मतदाताओं के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। इन श्रेणियों में मंत्री, उनके परिवार के सदस्य, न्यायपालिका से जुड़े लोग, नौकरशाह, जनप्रतिनिधि और कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियां शामिल होने की बात सामने आई है। हालांकि, कुछ श्रेणियों को लेकर रिपोर्ट में सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

VIP मतदाताओं को लेकर पहले से मौजूद है प्रावधान

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मतदाताओं को ‘marked electors’ के तौर पर चिह्नित करने का प्रावधान चुनाव आयोग के नियमों और मैनुअल में पहले से मौजूद है। 2023 के चुनावी रोल मैनुअल में सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, घोषित पदों पर बैठे लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, न्यायपालिका तथा सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कुछ व्यक्तियों को इस श्रेणी में चिह्नित करने का प्रावधान बताया गया है। दिल्ली CEO कार्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक, राजधानी में VIP मतदाताओं की सूची में करीब 3,000 नाम हैं। नई सुविधा को लेकर अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य ऐसे मतदाताओं की पहचान और उनके दस्तावेजी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना है।

SIR के बीच फीचर पर क्यों उठे सवाल?

यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में SIR के दौरान कई चर्चित लोगों के नाम मतदाता सूची से जुड़ी ‘logical discrepancy’ या ‘unmapped’ श्रेणी में सामने आने के बाद विवाद हुआ है। रिपोर्ट में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई प्रमुख नामों का उल्लेख किया गया है। द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने अपनी पड़ताल में दावा किया है कि कुछ VIP मतदाताओं के मामलों को सामान्य मतदाताओं की तुलना में अलग तरीके से संभालने के लिए ऐप, अधिकारियों के निर्देश और WhatsApp समूहों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, आम मतदाताओं को नोटिस मिलने पर सुनवाई में शामिल होकर अपनी पात्रता साबित करनी पड़ रही है, जबकि कुछ VIP मतदाताओं के मामलों में अधिकारियों ने दस्तावेज जुटाने और प्रक्रिया पूरी करने के लिए अलग व्यवस्था अपनाई।

हालांकि, चुनाव आयोग के नियमों में ‘marked electors’ के लिए विशेष प्रक्रिया का प्रावधान होने की बात भी हिन्दुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट की है। ऐसे मतदाता नोटिस से पूरी तरह बाहर नहीं होते, लेकिन उन्हें प्रक्रिया में सुविधा दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। फिलहाल ‘Mark VIP’ फीचर को लेकर चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में इस सुविधा का उद्देश्य, इसके इस्तेमाल की सीमा और इसके पीछे लागू नियमों को लेकर आयोग के जवाब का इंतजार है।