पाकिस्तान के विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान इन दिनों कथित ऑनलाइन बेटिंग और जुआ वेबसाइटों से जुड़े मामले की जांच का सामना कर रहे हैं। इसी बीच उनकी एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर खासी चर्चा का विषय बन गई है। तस्वीर में रिजवान अपनी टीम की जर्सी पर लगे एक बेटिंग ऐप के लोगो को टेप से ढके नजर आ रहे हैं। इसी पुरानी घटना को मौजूदा जांच से जोड़कर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, यह तस्वीर अपने आप में मौजूदा जांच में किसी तरह की संलिप्तता साबित नहीं करती।

फोन की भी हो रही जांच

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंग्लैंड दौरे के दौरान रिजवान और इमाम-उल-हक के मोबाइल फोन पाकिस्तानी अधिकारियों ने जांच के लिए अपने कब्जे में लिए थे। पाकिस्तान लौटने के बाद इन दोनों खिलाड़ियों से राष्ट्रीय साइबर क्राइम जांच एजेंसी (NCCIA) ने पूछताछ की। एजेंसी कथित तौर पर फोन में मौजूद गतिविधियों और बेटिंग व जुआ वेबसाइटों से जुड़े संभावित लिंक की पड़ताल कर रही है। रिजवान ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की एंटी करप्शन यूनिट से भी संपर्क किया है। उन्होंने यह जानने की कोशिश की है कि अगर किसी खिलाड़ी पर भ्रष्टाचार से जुड़े होने का संदेह हों तो संबंधित बोर्ड और ICC की प्रक्रिया क्या होती है।

पुरानी तस्वीर ने फिर खींचा ध्यान

रिजवान की पुरानी तस्वीर इसलिए चर्चा में आई क्योंकि इसमें वह जर्सी पर दिखाई दे रहे बेटिंग ऐप के लोगो को टेप से ढकते नजर आए थे। उस समय उनकी इस कार्रवाई को बेटिंग ब्रांड के प्रचार से दूरी बनाने की कोशिश के तौर पर देखा गया था। अब मौजूदा जांच के बीच वही तस्वीर दोबारा सामने आई है। जिससे सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, पुरानी तस्वीर और मौजूदा जांच के बीच कोई सीधा संबंध आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। रिजवान के खिलाफ ऑनलाइन बेटिंग या जुए से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप अभी जांच के स्तर पर है।

कोर्ट से भी राहत नहीं

मोहम्मद रिजवान ने अदालत में NCCIA की जांच के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी । 17 सितंबर को लाहौर हाई कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया गया। इसके बाद जांच का रास्ता खुला रहा। फिलहाल पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सार्वजनिक रूप से यह साफ नहीं बताया है कि वह रिजवान को किसी भ्रष्टाचार संबंधी मामले में आरोपी मानता है या नहीं। ऐसे में जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक इस मामले में किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा।