Emergency Advisory For Citizens Hindi News : कई विकसित और विकासशील देशों में अजीब-सी सुगबुगाहट और विशेष तैयारी दिख रही है। सरकारों ने नागरिकों को अपने घर में राशन, पानी और जरूरी सामान का स्टॉक करने की सलाह दी है। ब्रिटेन अपने नागरिकों को कम-से-कम 72 घंटे का जरूरी सामान घर में रखने को कहा है तो अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों को 90 दिनों तक बाहरी सप्लाई के बिना चलाने की बड़ी योजना पर काम कर रहा। जापान समेत दर्जनों देशों ने आपातकालीन किट तैयार रखने की एडवाइजरी जारी की है। सवाल है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो रहा कि दुनियाभर की सरकारें इमरजेंसी तैयारी पर इतना जोर दे रहीं?
सरकारों की चिंता की मुख्य वजहें क्या?
देशों की चिंताएं भले अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हों, लेकिन सबका संदेश एक है-किसी संकट की स्थिति में जनता और अहम संस्थानों को शुरुआती दिनों में खुद को संभालने में पूरी तरह सक्षम होना चाहिए। सरकारें चाहती हैं कि संकट की शुरुआती घड़ियों में लोग पूरी तरह सरकारी मदद या राहत तंत्र पर निर्भर नहीं रहें।
ब्रिटेन और यूरोप : ब्रिटिश सरकार का मानना है कि खराब मौसम, बाढ़, जंगलों में आग, बिजली और इंटरनेट सेवाओं में रुकावट, खतरनाक साइबर हमले व महत्वपूर्ण ढांचे पर संभावित हमलों जैसी स्थितियां आम जनजीवन को तबाह कर सकती हैं। ब्रिटेन के रक्षा अधिकारियों ने सप्लाई चेन में रुकावट तथा विदेशी ताकतों की दखलअंदाजी को गहरी चिंता जताई है। यूरोपीय आयोग ने मार्च 2025 में अपनी प्रिपर्डनेस यूनियन स्ट्रेटेजी का ऐलान कर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु परिवर्तन के खतरों का जिक्र किया था। ब्रिटिश पीएम ने खुद इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपनी अलमारी में फलियां (बीन्स) और सूप स्टोर कर रखा है।
अमेरिका की सैन्य रणनीति : अमेरिका का मामला थोड़ा अलग है, जहां नागरिकों के साथ सैन्य तैयारियों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा। अमेरिकी रक्षा विभाग ने FORTRESS नाम से खास पहल शुरू की है। इसके तहत प्रमुख सैन्य ठिकानों को न्यूनतम 90 दिनों तक बिजली, पानी, ईंधन व संचार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए बाहरी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहने लायक बनाया जा रहा। अमेरिकी सोच है कि भविष्य के संघर्ष सिर्फ जंग के मैदान तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि बिजली नेटवर्क, सप्लाई चेन व संचार व्यवस्था सीधे निशाने पर हो सकती हैं।
जापान का प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला : जापान की चिंता युद्ध नहीं, बल्कि प्रकृति का कहर है। भूकंप, सुनामी व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील होने से जापान लंबे समय से नागरिकों को आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रखता है। सरकार का कहना है कि बड़े भूकंप के बाद जब बिजली और परिवहन ठप हो जाएं तो परिवारों को खुद संभलना होगा।
देशों में तैयारी के अलग-अलग नियम
3 दिन की तैयारी : फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, मैक्सिको, नीदरलैंड, कनाडा, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर में नागरिकों को न्यूनतम 72 घंटों के लिए राशन-पानी, दवाइयों की किट तैयार रखने को कहा है। फ्रांस के नॉरमैंडी क्षेत्र की सरकार ने तो सोशल मीडिया पर लिखा-इमरजेंसी का इंतजार नहीं करें, अभी तैयारी कर लें।
एक हफ्ते से 10 दिन की तैयारी : स्वीडन और नॉर्वे जैसे देशों ने नागरिकों को एक हफ्ते का। जर्मनी ने न्यूनतम 10 दिनों का जरूरी सामान स्टोर करने की सलाह दी है।
भारत और अन्य देश : भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) लोगों को इमरजेंसी के वक्त किट रखने की सलाह तो देता है, लेकिन इसके लिए फिक्स डेडलाइन तय नहीं की गई है। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की वेबसाइट रेडी डॉट जीओवी पर भी नागरिकों से कई दिनों तक चलने लायक अपना खाना और पानी खुद सुरक्षित रखने को कहा गया है।
वैश्विक स्तर पर एडवाइजरी जारी करने वाले प्रमुख देशों की सूची
यूरोप : यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, पोलैंड, चेक गणराज्य, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड और क्रोएशिया।
उत्तरी अमेरिका : अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको।
दक्षिण अमेरिका : चिली, कोलंबिया, अर्जेंटीना, ब्राजील।
अफ्रीका : दक्षिण अफ्रीका।
एशिया : जापान, ताइवान, इजरायल, भारत, फिलीपींस, सिंगापुर।
ओशिनिया : न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया।
इमरजेंसी किट में क्या-क्या रखना जरूरी?
दीर्घकालिक राशन : लंबे समय तक खराब न होने वाली खाने-पीने की चीजें और सूखा राशन।
स्वच्छ पेयजल : पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी।
चिकित्सा सहायता : आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां और फर्स्ट Aid बॉक्स।
संचार व उपकरण : टॉर्च, एक्स्ट्रा बैटरी, बैटरी से चलने वाला या इमरजेंसी रेडियो।
क्या दुनिया किसी बड़े युद्ध या महाआपदा की ओर बढ़ रही?
कई देशों की एक जैसी तैयारियों को देख सवाल उठना स्वाभाविक है। मगर, इन एडवाइजरी का स्पष्ट मतलब यह नहीं है कि दुनिया में जल्द कोई बड़ा युद्ध होने वाला है या किसी महाआपदा की निश्चित चेतावनी जारी कर दी गई है। दरअसल, सरकारें अब एक साथ कई खतरों को ध्यान में रख अपनी तैयारी मजबूत कर रहीं। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, जंगलों में आग और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ती चिंता का विषय हैं। साइबर हमले, बिजली और संचार नेटवर्क पर खतरे, वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट और देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव भी सरकारों की चिंता बढ़ा रहे हैं। आज किसी बड़े संकट का असर केवल उस जगह तक सीमित नहीं रह सकता, जहां घटना हुई है। एक देश में सप्लाई चेन बाधित होने से दूसरे देशों में जरूरी सामान की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी तरह बिजली या संचार व्यवस्था पर साइबर हमले का असर आम नागरिकों से लेकर सैन्य संस्थानों तक पड़ सकता है। इसलिए सरकारों का संदेश है कि आपदा आने के बाद तैयारी शुरू करने के बजाय पहले से जरूरी इंतजाम कर लिए जाएं। ब्रिटेन के 72 घंटे के घरेलू स्टॉक से लेकर अमेरिका की 90 दिनों वाली सैन्य योजना तक, इन सभी कोशिशों का मूल उद्देश्य संकट के शुरुआती दौर में आत्मनिर्भर बने रहना है।