India lashes out on America : अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों के प्रति ट्रंप प्रशासन की तरफ से इस्तेमाल की गई शब्दावली पर मोदी सरकार ने कड़ा जवाब दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा भारतीय कुशल कर्मचारियों के संदर्भ में बंधुआ मजदूर (इन्डेन्चर्ड लेबर) जैसे पदबंध का प्रयोग किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा आधिकारिक वक्तव्य जारी किया। यह पूरा घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा विदेशी कार्यबल के वीजा एवं ग्रीन कार्ड नियमों को और कठोर बनाने के निर्णयों से उपज है। हाल में अमेरिकी श्रम विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी समेत 8 प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रमों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि ये संस्थान स्थानीय श्रमबल की उपेक्षा कर कम पारिश्रमिक पर विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त कर रहे। इसी प्रतिबंध का बचाव करते हुए वेंस ने टिप्पणी की थी कि एच-1बी वीजाधारक कार्यमुक्त होने के भय से नियोक्ताओं पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं, जो आधुनिक परिप्रेक्ष्य में एक प्रकार का बंधुआ श्रम है।

भारत सरकार का पक्ष और मुख्य आपत्तियां

तकनीकी योगदान की उपेक्षा : भारतीय पेशेवर किसी विवशता के तहत नहीं, बल्कि अपनी उच्च शिक्षा, विशेषज्ञता और असाधारण योग्यता के बल पर वैश्विक कंपनियों में सेवा दे रहे।

ऐतिहासिक संदर्भ और शब्दावली पर आपत्ति : इन्डेन्चर्ड लेबर शब्द औपनिवेशिक काल के शोषणकारी अतीत से जुड़ा है। द्विपक्षीय और सुदृढ़ रणनीतिक संबंधों के माहौल में ऐसी शब्दावली का प्रयोग अनुचित है।

द्विपक्षीय आर्थिक लाभ : कुशल मानव संसाधन का यह प्रवाह केवल भारतीय विशेषज्ञों के हित में नहीं, बल्कि अमेरिकी तकनीकी प्रभुत्व और वहां की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी मौलिक भूमिका निभाता है।

भावी स्थिति और प्रभाव

अचानक लगाए गए इन प्रतिबंधों से हजारों भारतीय विशेषज्ञों की कार्य स्थिति और कानूनी स्थिति पर संशय पैदा हो गया है। अमेरिकी प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं, मगर भारत सरकार ने कहा है कि वह अपने नागरिकों के विधिक एवं पेशेवर अधिकारों की सुरक्षा हेतु अमेरिकी अधिकारियों के निरंतर संपर्क में है।