Donald Trump Statement On Nobel Peace Prize : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि उन्हें यह सम्मान न देकर नॉर्वे ने अपने माथे पर एक ऐसा अमिट कलंक लगा लिया है, जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकेगा। इस निर्णय को शर्मनाक और घोर अपमानजनक करार देते हुए ट्रंप का दावा है कि दुनियाभर में करीब आठ युद्धों को टालने के बदले उन्हें आठ बार नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए था। इस वर्ष यह शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की पूर्व संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लै को दिया गया है। ट्रंप ने पिल्लै पर तंज कसा और कहा कि वह ऐसी लिबरल महिला हैं, जो यूएन के लिए काम करती हैं और जिनके नाम से कोई वाकिफ तक नहीं है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का भी दावा

ट्रंप ने अपने दावों को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान जैसे दो परमाणु संपन्न देशों को सीधी जंग में कूदने से रोका, जिससे लगभग पांच करोड़ इंसानों की जान बच सकी। इसके साथ ही उन्होंने ईरान, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे महासंग्राम को भी समाप्त कराने की दिशा में अपने प्रयासों का जिक्र किया। ट्रंप के मुताबिक अमेरिका इस पुरस्कार का असली हकदार था, लेकिन ऐसा न करके नॉर्वे ने पक्षपात किया है और अमेरिका इस भूल को कभी भुला नहीं पाएगा। उन्होंने कहा, अगर वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से न रोकते तो मध्य-पूर्व के साथ-साथ यूरोप-अमेरिका में भयंकर तबाही मच जाती। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानव इतिहास में किसी भी अकेले शख्स ने इतने लोगों की जान नहीं बचाई है, जितनी उन्होंने बचाई है।

2018 से पुरस्कार की मांग कर रहे ट्रंप

गौरतलब है कि ट्रंप द्वारा नोबेल पुरस्कार की मांग करना नई बात नहीं है। साल 2018 के अक्टूबर महीने में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि कोरिया तथा सीरिया में शांति लाने की तमाम कोशिशों के बावजूद शायद उन्हें कभी यह पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। साल 2019 के फरवरी महीने में उन्होंने दावा पेश किया और बताया कि जापान के तत्कालीन पीएम शिंजो आबे ने उनका नाम नोबेल के लिए आगे बढ़ाया है। साल 2019 में ही पाकिस्तान के एक पत्रकार के सवाल पर उन्होंने कहा था कि अगर निष्पक्षता से फैसला हो तो उन्हें कई कार्यों के लिए नोबेल मिलना चाहिए। वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए अपनी तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से की थी।

पिल्लै ने ली ट्रंप की चुटकी

दूसरी तरफ नॉर्वे की नोबेल समिति ने साल 2026 का यह प्रतिष्ठित शांति पुरस्कार भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक नवनीतम नवी पिल्लै को देने का निर्णय लिया। इस घोषणा के बाद जब समर्थकों ने जोरदार तालियां बजाईं तो पिल्लै ने ट्रंप पर चुटकी लेते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि वे थोड़ा और ताली बजाएंगे तो शायद वे इस पुरस्कार को ट्रंप के साथ साझा कर लेंगी। रंगभेद के खिलाफ लड़ाई में नेल्सन मंडेला जैसे दिग्गजों का साथ देने वाली पिल्लै को युद्ध अपराधों, नरसंहार के आरोपियों को अंजाम तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को सशक्त बनाने के उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है। नोबेल समिति का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और तनाव के इस दौर में शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सख्ती से पालन होना बेहद जरूरी है।

मारिया कोरीना ने ट्रंप को अपना पुरस्कार सौंपना चाहा था

ट्रंप से जुड़ा रोचक वाकया यह भी है कि जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को साल 2025 में लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने हेतु नोबेल मिला था तो उन्होंने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात कर अपना मेडल उन्हें सौंपने की पेशकश की थी। हालांकि, इससे ट्रंप आधिकारिक तौर पर विजेता नहीं बन सके और पदक मचाडो के पास ही रहा, क्योंकि नोबेल समिति के नियमों के अनुसार यह पुरस्कार किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित या साझा नहीं किया जा सकता।

4 राष्ट्रपति हो चुके हैं सम्मानित

अमेरिकी इतिहास में अब तक चार राष्ट्रपति इस सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। इनमें थियोडोर रुजवेल्ट, बुडरो विल्सन, जिमी कार्टर, बराक ओबामा शामिल हैं। ओबामा को उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के पहले साल में यह पुरस्कार मिल गया था। ट्रंप कई बार ओबामा को मिले इस पुरस्कार पर सवाल उठाते रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि ओबामा को केवल आठ महीने के भीतर ही बिना कुछ खास किए यह सम्मान दे दिया गया था, जबकि इसका स्पष्ट कारण खुद ओबामा को भी कभी समझ नहीं आया।