अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क (Elon Musk) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी टिप्पणियों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। इस बार वह अपनी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी मिलने में हो रही देरी को लेकर चर्चा में हैं। मस्क ने इस मामले में भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी स्टारलिंक की भारत में एंट्री का रास्ता रोक रहे हैं। मस्क ने एक्स पर सवाल उठाते हुए लिखा, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?” उनकी इस टिप्पणी के बाद विवाद और गहरा गया।
मस्क के आरोपों पर भारत सरकार ने क्या कहा?
भारत सरकार के संचार मंत्रालय ने मस्क के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद और गलत बताया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाओं से जुड़े नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे वह स्टारलिंक हो या रिलायंस जियो। सरकार के मुताबिक, नियामकीय प्रक्रिया में किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। मंत्रालय ने कहा कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन नियामकीय ढांचा निष्पक्ष और भेदभाव रहित है। साथ ही, स्टारलिंक समेत तीन कंपनियां फिलहाल सुरक्षा जांच से जुड़े समान नियामकीय चरणों से गुजर रही हैं। मस्क का दावा है कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से अधिक देशों में सेवाएं देने के लिए लाइसेंस मिल चुका है। इसके बावजूद भारत में कंपनी की व्यावसायिक शुरुआत की प्रक्रिया लंबी खिंचने पर उन्होंने सवाल उठाए। मस्क ने इस देरी पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर भारत में स्टारलिंक को सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिलने में इतना समय क्यों लग रहा है और क्या मुकेश अंबानी का देश में इतना प्रभाव है कि कंपनी की एंट्री रोकी जा रही है?
मस्क ने और क्या कहा?
उल्लेखनीय है कि इससे पहले, मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी के लिए कुछ प्रभावशाली कारोबारियों को जिम्मेदार ठहराया था। उनका आरोप था कि ये कारोबारी अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की भारत में एंट्री का विरोध कर रहे हैं। एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने लिखा, “दुर्भाग्य से, कुछ खास उद्योगपति हमें रोक रहे हैं, ताकि भारतीय लोगों पर उनका एकाधिकार कायम रहे। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं। यह भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है।” मस्क ने जिस पोस्ट पर यह टिप्पणी की थी, उसमें कहा गया था कि भारत के कई गांवों और दूरदराज के इलाकों में अब भी हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा सीमित है। स्टारलिंक की सैटेलाइट तकनीक उन क्षेत्रों तक तेज इंटरनेट पहुंचा सकती है, जहां फाइबर नेटवर्क या मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना मुश्किल है। पोस्ट के मुताबिक, स्टारलिंक भारत में 20 गेटवे साइट तैयार कर चुकी है। इसकी सेवाएं शिक्षा, टेलीमेडिसिन, छोटे कारोबार और आपदा के समय संचार सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, कंपनी को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए शेष नियामकीय मंजूरियों और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
भारत में कब से अटकी है स्टारलिंक की एंट्री?
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक ने 2022 में भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की दिशा में प्रयास शुरू किए थे। जून 2025 में कंपनी को दूरसंचार विभाग से जीएमपीसीएस (GMPCS) यानी सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस मिला। इसके बाद सितंबर 2025 में उसे परीक्षण के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किया गया। हालांकि, लाइसेंस और ट्रायल के लिए स्पेक्ट्रम मिलने के बावजूद भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। सुरक्षा संबंधी मंजूरियों और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं के पूरा होने का इंतजार है।