Maharashtra UCC Controversy News : महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने के लिए गठित सात सदस्यीय समिति से बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने UCC पर जनता की राय जुटाने की प्रक्रिया और समिति की बैठक में एक बाहरी व्यक्ति के हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताते हुए यह कदम उठाया। बता दें, राज्य सरकार ने जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया था। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में UCC लागू करने के लिए नियम, रूपरेखा और सिफारिशें तैयार करना है। समिति की दूसरी ऑनलाइन बैठक 19 सितंबर को हुई थी। बैठक के कुछ घंटों बाद जस्टिस चव्हाण ने इस्तीफा भेजा। राज्य सरकार ने 21 सितंबर को उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया।
फीडबैक प्रश्नों पर मतभेद
बैठक का मुख्य उद्देश्य नागरिकों से सुझाव एवं फीडबैक लेने के लिए प्रश्नावली को अंतिम रूप देना था। इस्तीफे के पत्र में जस्टिस चव्हाण ने लिखा कि बैठक में कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि जनता से प्रश्नों के उत्तर केवल हां या नहीं के विकल्प में लिए जाएं। जस्टिस चव्हाण के मुताबिक उनका मानना था कि समिति का असली उद्देश्य राज्य के लोगों की खुली राय जानना और संवेदनशील मुद्दों पर आम सहमति बनाना है। वैसे, बैठक की कार्यवाही से उन्हें यह आभास हुआ कि प्रक्रिया को केवल आंकड़ों के आसान विश्लेषण तक सीमित किया जा रहा है। जनता को अपनी विस्तृत बात रखने के बजाय सिर्फ पूर्व-निर्धारित सवालों पर हां या नहीं में जवाब देने का मौका दिया जा रहा था, जिससे वे असहमत थे।
गैर-सदस्य की भूमिका पर उठाए सवाल
अपने इस्तीफे में जस्टिस चव्हाण ने बैठक में एक गैर समिति सदस्य की मौजूदगी और उसकी सक्रिय भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उस अज्ञात शख्स ने राज्य के अधिकारियों की ओर से बनाई गई वेबसाइट में बदलाव की जरूरत जताई। उसके बाद समिति अध्यक्ष ने अधिकारियों को एक हफ्ते में संशोधन करने के निर्देश दे दिए। जस्टिस चव्हाण ने कहा, उन्हें बिल्कुल स्पष्ट नहीं हुआ कि वह इंसान किस हैसियत या भूमिका में बैठक में था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगा जैसे राज्य के अधिकारियों को अपनी क्षमताओं पर संदेह हो। इन्हीं परिस्थितियों के चलते उन्होंने समिति छोड़ने का फैसला किया, जिससे सरकार किसी नए सदस्य को नियुक्त कर सके।
कौन-कौन हैं समिति में?
समिति में जस्टिस रंजना देसाई, बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एसजी मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, संविधान विशेषज्ञ रमेश पतंगे, सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णा रावल हैं। जस्टिस चव्हाण के अचानक अलग होने से समिति की भावी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।