कर्नाटक विधान परिषद चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की है। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस को किसी भी सीट पर सफलता नहीं मिली। 23 अक्टूबर को शिक्षकों और स्नातकों के चार निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की गई। इस चुनाव में भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी जेडी(S) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। नतीजों ने दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल को सामने रखा है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह परिणाम शिक्षकों और स्नातकों के बीच अपने समर्थन का आकलन करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

चार सीटों पर किसने दर्ज की जीत?

कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार परिणाम इस प्रकार रहे: 

- बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: जेडी(S) के ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। रंगनाथ को 10,810, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट मिले।

- पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा के एस.वी. संकनूर ने कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई को हराकर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की।

- दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस के शशि हुलिकुंटे मठ को पराजित किया।

- उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा के मौजूदा MLC शशील जी. नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को हराकर सीट बरकरार रखी। यह इस निर्वाचन क्षेत्र से उनकी पांचवीं जीत बताई गई है।

भाजपा को तीन, जेडी(S) को एक सीट

चार सीटों के नतीजों में भाजपा को तीन और जेडी(S) को एक सीट मिली। कांग्रेस चारों निर्वाचन क्षेत्रों में जीत से दूर रही। बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडी(S) की जीत खास रही, क्योंकि रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टन्ना को हराया। पुट्टन्ना इससे पहले जेडी(S) में रह चुके थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए थे। इन नतीजों से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर तत्काल असर पड़ने की संभावना नहीं है। 75 सदस्यीय विधान परिषद में चुनाव से पहले कांग्रेस के 38, भाजपा के 24 और जेडी(S) के छह सदस्य थे। सदन में एक निर्दलीय सदस्य और सभापति भी हैं, जबकि सरकार की ओर से नामित किए जाने वाले पांच पद खाली हैं। इसलिए चार सीटों का परिणाम परिषद में समग्र शक्ति-संतुलन को बदलने के बजाय राजनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण है। भाजपा और जेडी(S) इसे अपने गठबंधन के तालमेल के नतीजे के तौर पर पेश कर सकते हैं, जबकि कांग्रेस के सामने अपने उम्मीदवारों के प्रदर्शन की समीक्षा करने की चुनौती होगी।

2028 के चुनाव से पहले गठबंधन के लिए अहम नतीजे

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव 2023 में हुए थे और अगला नियमित विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में विधान परिषद के इन चुनावों को भाजपा-जेडी(S) गठबंधन के आपसी समन्वय और शिक्षकों व स्नातकों के बीच समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन चार निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों से पूरे राज्य के मतदाताओं की पसंद का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।