CJP Delhi Jantar Mantar Protest News : दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस-प्रशासन बेहद सख्त हो गया है। पुलिस ने आंदोलन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। मंजूरी नहीं देने के पीछे वजह बताई गई है कि आयोजकों ने कार्यक्रम के बारे में बहुत देर से सूचना दी थी। इसी सुरक्षा व्यवस्था के तहत रेलवे ने बड़ा कदम उठाते हुए नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली तमाम मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को कल (10 अक्टूबर) के लिए रद्द कर दिया है। इन सभी ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से नहीं चलाया जाएगा। दूसरी तरफ CJP और वामपंथी संगठनों ने आरोप लगाया है कि उनके समर्थकों को देशभर में जगह-जगह पकड़ा जा रहा है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने प्रदर्शन रोकने के लिए 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का निर्णय लिया है और हिरासत में लिए जाने वाले लोगों के लिए 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए हैं।
ये मेट्रो स्टेशन रहेंगे बंद
मध्य दिल्ली : जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, नई दिल्ली, सेवा तीर्थ (उद्योग भवन), मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, आईटीओ, दिल्ली गेट, खान मार्केट, आरके आश्रम मार्ग, झंडेवालान, सुप्रीम कोर्ट, इंद्रप्रस्थ और शिवाजी स्टेडियम।
दक्षिण दिल्ली : आईएनए (दोनों लाइन), हौज खास, जोर बाग, अर्जनगढ़, सराय काले खां-निजामुद्दीन, लाजपत नगर, जंगपुरा, आश्रम, कालिंदी कुंज, जसोला, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और ओखला विहार।
पुरानी दिल्ली और उत्तरी क्षेत्र : चावड़ी बाजार, जामा मस्जिद, करोल बाग, राजेंद्र प्लेस, विश्वविद्यालय, विधानसभा, सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, इंदरलोक, जीटीबी नगर, कन्हैया नगर, नेताजी सुभाष प्लेस, आजादपुर, आदर्श नगर, जहांगीरपुरी, हैदरपुर बादली मोड़, मजलिस पार्क और शालीमार बाग।
पूर्वी दिल्ली और रोहिणी : सीलमपुर, मौजपुर, जाफराबाद, वेलकम, यमुना विहार, खजूरी खास, शाहदरा, रिठाला, रोहिणी ईस्ट और रोहिणी वेस्ट।
विद्यार्थियों को हिरासत में लेने के दावों से बढ़ा तनाव
बीती रात (8 अक्टूबर) CJP की तरफ से यह कहा गया कि पुणे से दिल्ली आ रहे विद्यार्थियों को रास्ते में हिरासत में लिया गया। उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। पार्टी ने मध्य प्रदेश का एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें चलती बस के भीतर बैठे कुछ युवक मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा खुद को हिरासत में लिए जाने की बात कह रहे। मामले पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के धरने की इजाजत नहीं है। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 लागू कर दी गई है, जिसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर रोक है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गेस्ट हाउसों, स्टेशनों और रास्तों पर पैनी नजर
होटल और गेस्ट हाउसों में पड़ताल : पुलिस टीमें होटलों में जाकर रजिस्टरों की जांच कर रही हैं। वहां ठहरे हर व्यक्ति का पहचान-पत्र और जानकारी बारीकी से खंगाली जा रही है।
8 से 11 अक्टूबर के मेहमानों पर फोकस : विशेष रूप से 8 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच कमरे बुक कराने वाले और संदिग्ध लगने वाले लोगों से पूछताछ की जा रही।
20 से 30 साल के युवाओं से सवाल-जवाब : समूहों में आने वाले यात्रियों और खासकर 20 से 30 वर्ष के युवाओं से दिल्ली आने की वजह पूछी जा रही।
बुकिंग और ठहरने वालों का मिलान : बुकिंग किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है और कमरे में कोई और ठहरा है, तो पहचान पत्र का मिलान कर सख्ती से जांच हो रही।
बसों और परिवहन पर निगरानी : नई दिल्ली की तरफ लोगों का जमावड़ा न हो, इसलिए बस ऑपरेटरों और उनकी बुकिंग पर नजर रखी जा रही।
एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर चेकिंग : रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट के आसपास बड़े समूहों में दिखने वाले लोगों की कड़ी चेकिंग हो रही।
सोशल मीडिया से तीखे वार और प्रदर्शन का ऐलान
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा-भले सत्ता सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें जनता की हैं और वहीं से लोकतंत्र वापस लिया जाएगा। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर के आंदोलन से ठीक पहले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री को लगता है कि जेल में डालकर आवाजों को दबाया जा सकता है, लेकिन जितने अधिक लोग हिरासत में लिए जाएंगे, प्रदर्शन उतना ही बड़ा होगा। CJP 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करने वाली है। इससे पहले 2 अक्टूबर को दीपके ने पोस्ट कर चेतावनी दी थी कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर से कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिस उन्हें जंतर-मंतर जाने से रोकती है तो वे उसी जगह जंतर-मंतर बना देंगे जहां उन्हें रोका जाएगा।
चुनाव आयोग के भीतर उठते सवाल
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के SIR से जुड़े फैसलों पर 14 बार असहमति दर्ज कराई थी। दोनों आयुक्तों ने आरोप लगाया कि कई निर्णय उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। इन आपत्तियों की प्रति मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों अधिकारियों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने व बहाल करने के नियमों के साथ चुनावी डेटा और उसके सॉफ्टवेयर की सुरक्षा पर चिंता जताई थी। उन्होंने वोटर बनने वाले फॉर्म-6 में SIR से जुड़ा सवाल शामिल करने पर भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने सॉफ्टवेयर के डेटा एक्सेस को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा था और काम के बंटवारे वाले आदेश को नियमों के खिलाफ बताया था।
देशभर में प्रदर्शन और वामपंथी संगठनों का आरोप
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में 7 बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। वामपंथी छात्र संगठन SFI का आरोप है कि पुलिस SFI और अन्य लोकतांत्रिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मार रही है, उन्हें हिरासत में ले रही है। परिजनों को डरा रही है।