Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर को प्रसाद की तैयारी और वितरण में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन करने के लिए FSSAI के भोग कार्यक्रम के तहत सबसे ऊंची ‘अति विशिष्ट’ रेटिंग मिली है। जांच में मंदिर को 114 में से 103 अंक मिले हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरी ने कहा कि मंदिर में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद की शुद्धता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रसाद धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा है और साफ-सफाई भी पवित्रता का हिस्सा है।

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (UPFSDA) की विशेष सचिव और अतिरिक्त आयुक्त रेखा चौहान ने बताया कि BHOG कार्यक्रम, FSSAI के व्यापक ‘ईट राइट’ अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी सुरक्षित और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा दिया जाता है।

FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजित पुन्हानी ने एक कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट को प्रमाणपत्र दिया। उन्होंने कहा कि प्रसाद लोगों की आस्था और सम्मान से जुड़ा है। इसलिए भक्तों को सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता वाला प्रसाद उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है।

कब तक वैध रहेगा प्रमाणपत्र?

BHOG कार्यक्रम के तहत धार्मिक स्थलों के पास वैध FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण होना जरूरी है। इसके बाद अधिकृत ऑडिटर परिसर का निरीक्षण करता है। साथ ही, खाद्य सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों और सुपरवाइजरों को निर्धारित प्रशिक्षण भी दिया जाता है। राम मंदिर को मिला यह प्रमाणपत्र दो साल तक वैध रहेगा। इस दौरान राज्य और केंद्र की संबंधित एजेंसियां निरीक्षण और ऑडिट के जरिए खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच करेंगी। मंदिर ट्रस्ट भी नियमों के पालन की समीक्षा के लिए हर दो सप्ताह में आंतरिक जांच करेगा।

5 अन्य धार्मिक स्थलों को भी मिला सर्टिफिकेट

राम मंदिर के अलावा अयोध्या के पांच अन्य धार्मिक स्थलों को भी यह प्रमाणपत्र मिला है। इनमें हनुमानगढ़ी, कनक भवन, एक जैन मंदिर और देवकाली मंदिर शामिल हैं। भोग कार्यक्रम के तहत धार्मिक स्थलों का मूल्यांकन 47 मानकों वाली चेकलिस्ट के आधार पर किया जाता है। इसमें अधिकतम 114 अंक दिए जा सकते हैं। 100 से 114 अंक पाने वाले स्थलों को ‘अति विशिष्ट’ रेटिंग मिलती है, जबकि 91 से 99 अंक पाने वालों को ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रखा जाता है। 77 से 90 अंक पाने वाले संस्थानों को दोबारा ऑडिट से पहले सुधार करना होता है। वहीं, 77 से कम अंक मिलने पर उन्हें फिर से आवेदन करना पड़ता है।