Today Jantar Mantar Protest News : मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर आज फिर राजनीतिक घमासान का अखाड़ा बन गया है। वामपंथी छात्र संगठन आईसा (AISA), एसएफआई (SFI), एनएसयूआई (NSUI), आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कड़ी घेराबंदी के बावजूद जंतर-मंतर की ओर कूच किया। इस दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। पुलिस ने स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव समेत दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण भी पहुंचे, पुलिस से झड़प
संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास पुलिस ने कई स्तरों पर मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। इसके बावजूद वरिष्ठ वकील एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, प्रसिद्ध जनहित वकील प्रशांत भूषण, किसान नेता अविक साहा और आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समर्थकों के साथ पैदल जंतर-मंतर की तरफ बढ़ने लगे। प्रदर्शनकारियों को रोकते हुए जब दिल्ली पुलिस ने योगेंद्र यादव को बस में बैठाना शुरू किया तो उन्होंने कहा कि यह अंग्रेजों का शासन जैसा रवैया है। जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा नहीं होता, तब तक हमारा यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। बाद में सोशल मीडिया पर योगेंद्र यादव ने लिखा कि पुलिसिया तंत्र और गिरफ्तारियों के दम पर नागरिक अधिकारों को दबाया नहीं जा सकता। जनता ने सड़क पर उतरकर चुनाव आयोग के खिलाफ अपना महाभियोग दर्ज करा दिया है।
कल 700 से अधिक लोग लिए गए थे हिरासत में
विपक्ष और छात्र संगठनों का यह विरोध-प्रदर्शन दूसरे दिन जारी रहा। कल यानी 2 अक्टूबर को दिल्ली की सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे 700 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। कल शाम आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने वीडियो जारी कर शनिवार दोपहर 1 बजे दोबारा जंतर-मंतर पर एकत्रित होने का आह्वान किया था। बोरा ने कहा था कि पुलिसिया कार्रवाई और गिरफ्तारियों से आंदोलनकारी डरने वाले नहीं हैं। तय समय पर जैसे ही कार्यकर्ता शनिवार को जुटने शुरू हुए, पुलिस ने इलाके को सील कर दिया और धर-पकड़ शुरू कर दी।
क्यों भड़का है पूरा विवाद?
SIR के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली और मतदाताओं के नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर विपक्षी दल हमलावर हैं। इस आग में घी डालने का काम हाल में आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने किया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े अहम आदेशों पर लिखित में आपत्ति जताई थी। दोनों आयुक्तों का कहना था कि कई प्रमुख नीतियां उनकी मंजूरी या सलाह के बिना लागू की गईं। वैसे, चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संवैधानिक संस्था में आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। आयोग की तरफ से जारी सभी निर्देशों को पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त है।
यह वोट चोरी और देशद्रोह है: राहुल गांधी
इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला था। उन्होंने दिल्ली की एक बस्ती का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि वहां 728 में से 727 वोटरों के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए। राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोही होने और खुलेआम वोट चोरी कराने के गंभीर आरोप लगाए। इधर, मुंबई के शिवाजी पार्क से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीजेपी (CJP) और अन्य नागरिक संगठनों का यह साझा आंदोलन अब देशव्यापी शक्ल लेता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक चुनाव आयोग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होती, उनका जंतर-मंतर सत्याग्रह जारी रहेगा।