Rahul Gandhi News : वोटर लिस्ट में धांधली और गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की मांग पर अड़े कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को आज देर शाम पुलिस ने आकाशवाणी भवन परिसर से हिरासत में ले लिया है। उनके साथ मौजूद कई अन्य कार्यकर्ताओं को भी वहां से हटाया गया है । पूरे परिसर को खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है।
7 घंटे से धरना पर बैठे थे प्रियंका-राहुल, वहीं बिताने वाले थे रात
इससे पहले लगभग 7 घंटे से अधिक समय तक धरने पर बैठे राहुल गांधी ने समर्थकों के साथ वहीं रात बिताने का मन बना लिया था। आकाशवाणी का यह परिसर निर्वाचन आयोग के ठीक बगल में स्थित है। राहुल गांधी का साफ कहना था कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों से मिले बिना वहां से टस-से-मस नहीं होंगे। कांग्रेस की ओर से आयोग को इस बाबत आधिकारिक संदेश भी भेजा गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने सभी सांसदों को दिल्ली में ही डटे रहने की सख्त हिदायत दी है।
300 सांसदों के साथ मुलाकात की शर्त
कांग्रेस सूत्रों ने जानकारी दी है कि उन्होंने तीनों चुनाव आयुक्तों से समय मांगने के लिए एक औपचारिक पत्र भेजा है। आयोग का कोई अधिकारी अगले एक-दो दिनों में बैठक कराने का लिखित या ठोस आश्वासन दे देता तो राहुल गांधी आज का धरना समाप्त करने को तैयार थे। हालांकि, राहुल गांधी ने यह शर्त रखी है कि इस बैठक में उनके साथ विपक्षी गठबंधन के सभी 300 सांसद मौजूद रहेंगे। फिलहाल चुनाव आयोग की तरफ से इस मांग पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा कि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों से एक साथ मिलने की अनुमति देना आयोग के लिए मुश्किल होगा।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में महाजुटान, राष्ट्रपति से समय मांगा
इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए इंडिया गठबंधन ने अपनी रणनीतियां तेज कर दी हैं। 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए मैदान की बुकिंग करा ली गई है। इसके अलावा, विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने 7 या 8 अक्टूबर को राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। समय आगे बढ़ा तो 9 अक्टूबर को मुलाकात हो सकती है। राष्ट्रपति से मिलने वाले नेताओं के दल में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी नेता शरद पवार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राजद नेता तेजस्वी यादव, एमए बेबी और सीपीआई के डी राजा शामिल होंगे।
बुधवार को दिल्ली में बड़ा सियासी घमासान, AAP भी सड़कों पर उतरेगी
कल यानी बुधवार को दिल्ली में राजनीतिक हलचल और तेज होने के आसार हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस चुनाव आयोग के मुख्यालय जाने की रणनीति बना रही है, वहीं आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर का घेराव करने का ऐलान किया है। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों के नेता एवं कार्यकर्ता दोपहर 1 बजे कश्मीरी गेट पर जुटेंगे और साझा प्रदर्शन करेंगे।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का सीधा हमला
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अखिलेश ने पूछा, चुनाव आयोग किसके इशारे पर काम कर रहा है? आयोग का बुनियादी काम मतदाता पंजीकरण को आसान बनाना है ताकि आम जनता को सहूलियत मिले, न कि सत्ताधारी पार्टी की सह पर काम करना। उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष आयोग की गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाता है तो भाजपा उसके बचाव में आगे आ जाती है। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा आयोग के माध्यम से चुनावी व्यवस्था में धांधली कर रही है।
तिरंगे को लेकर अफसर और राहुल-प्रियंका में तीखी बहस
धरने के दौरान उस वक्त भारी हंगामा देखने को मिला जब एक पुलिस अधिकारी राष्ट्रीय ध्वज लेकर खड़े कार्यकर्ता की ओर बढ़ा। राहुल गांधी ने तुरंत आगे आकर अधिकारी को चेतावनी देते हुए कहा, इसे मत छूना। प्रियंका गांधी भी तिरंगे के सामने सुरक्षा घेरा बनाकर खड़ी हो गईं। अधिकारी का तर्क था कि झंडे में लगा डंडा किसी को चोट पहुंचा सकता है, जिस पर दोनों नेताओं ने सख्त लहजे में कहा कि यह कोई साधारण डंडा नहीं, बल्कि हमारा तिरंगा है।
संसद से शुरू हुआ था सेव डेमोक्रेसी मार्च
इससे पहले सुबह 10 बजे इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने संसद के मकर द्वार से सेव डेमोक्रेसी मार्च निकाला था। हालांकि, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग करके मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया और राहुल-प्रियंका समेत कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लेकर बस में बिठा दिया।
आयोग और पुलिस के अलग-अलग दावे
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने पहले जानकारी दी थी कि रात के समय ट्रैफिक बाधित होने के बावजूद वे नेताओं से शांतिपूर्ण तरीके से हटने की अपील कर रहे हैं और किसी बल प्रयोग की योजना नहीं है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी या विपक्षी दल के किसी भी नेता ने पूर्व में बैठक के लिए कोई लिखित प्रस्ताव या अपॉइंटमेंट नहीं मांगा था। वे बिना तय कार्यक्रम और एजेंडे के सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय में प्रवेश करना चाहते हैं। इस पर राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि संविधान उन्हें शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। अगर, पुलिस को आकाशवाणी परिसर में धरना देने से यातायात या सुरक्षा की समस्या हो रही है तो वे उन्हें कोई दूसरा वैकल्पिक स्थान मुहैया कराएं, लेकिन वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करते रहेंगे।