लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न तथा धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने से जुड़े मामलों पर उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में संस्थान के अलग-अलग विभागों में सामने आई शिकायतों, कथित नेटवर्क और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। शासन ने रिपोर्ट के आधार पर चिह्नित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 

STF की रिपोर्ट में कई विभागों का उल्लेख

रिपोर्ट के अनुसार, पैथोलॉजी, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों से जुड़े मामलों की जांच की गई। इसमें महिला रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों की शिकायतों का उल्लेख है। आरोप है कि कुछ महिलाओं को शादी का झांसा देकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए दबाव बनाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विरोध करने या शिकायत दर्ज कराने पर कुछ पीड़िताओं को करियर प्रभावित करने की धमकी दी गई। 

पहले से दर्ज मामलों का भी जिक्र

STF रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज से जुड़े मामले का उल्लेख है। एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर की शिकायत पर दिसंबर 2025 में लखनऊ के चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में आरोपी डॉक्टर को जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर और गांधी वार्ड के कुछ कर्मचारियों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इन प्रकरणों में अलग-अलग शिकायतें और जांच प्रक्रियाएं शामिल हैं। 

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप

रिपोर्ट में संस्थान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और संबंधित लोगों को संरक्षण देने की कोशिश की गई। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में संविदा कर्मचारी के खिलाफ महिला कर्मचारी की शिकायत का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत के बाद समिति गठित की गई थी, लेकिन कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। इन आरोपों की जिम्मेदारी और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच के दायरे में है। 

शासन ने कार्रवाई के निर्देश दिए

STF की रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 30 अक्टूबर को KGMU के कुलसचिव को पत्र भेजा। इसमें चिह्नित कर्मचारियों के खिलाफ KGMU अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई करने तथा उसकी रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप दर्ज हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप का उल्लेख अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित मामलों में पुलिस, संस्थान और अन्य सक्षम प्राधिकरणों की जांच तथा नियमानुसार कार्रवाई के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।