भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों के अधिकारों और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल प्रचार के लिए करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद को सैन्य निर्देशों के बजाय नागरिकों के कल्याण और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। भारत ने फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। साथ ही, भारत ने पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने की मांग दोहराई।

पाकिस्तान को नागरिकों की समस्या पर ध्यान देने की सलाह 

संयुक्त राष्ट्र में अल्पसंख्यक मुद्दों पर विशेष प्रतिवेदक के साथ संवाद के दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक देश की संप्रभु जिम्मेदारी है। रघु पुरी ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों को संविधान के तहत मिले संरक्षण का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों ने देश के विकास में अहम योगदान दिया है और वे सरकार तथा प्रमुख संस्थानों में उच्च पदों पर भी कार्यरत हैं। उन्होंने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह भारत पर टिप्पणी करने के बजाय अपने देश के नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान दे। 

23 अक्टूबर को भी पाकिस्तान को दिया था जवाब

इससे पहले 23 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। भारत की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर सवाल उठाए थे।उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या घट रही है और उनके अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आती रही हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाया था और कहा था कि आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाना चाहिए। 

कारगिल युद्ध का भी किया गया जिक्र

23 अक्टूबर की चर्चा में भारतीय प्रतिनिधि ने 1999 के कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने उस समय मारे गए अपने कुछ सैनिकों के शव स्वीकार नहीं किए थे, जबकि भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य सम्मान के साथ इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया था। भारत ने इस उदाहरण के जरिए पाकिस्तान के धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों पर दिए जा रहे बयानों पर सवाल उठाए। इस चर्चा में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अभियानों के दौरान मारे गए लोगों के शव परिजनों को सौंपने और अंतिम संस्कार से संबंधित मुद्दे भी उठे थे। 

जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख

संयुक्त राष्ट्र में अपने ताजा बयान में भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान से उसके कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने की मांग दोहराई और कहा कि इस्लामाबाद को अपने नियंत्रण वाले इलाकों में हो रहे घटनाक्रमों पर ध्यान देना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी कई बार आरोप-प्रत्यारोप हो चुके हैं। ताजा बयानबाजी दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक विवाद को दर्शाती है।