मौजूदा समय में भारत में क्रिकेट के लिए कई बड़े और आधुनिक स्टेडियम हैं, लेकिन इनमें से कई मैदानों को पूरे साल पर्याप्त मैच नहीं मिलते। इसके बावजूद देश के अलग-अलग शहरों में 28 नए इंटरनेशनल स्तर के स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन स्टेडियमों का इस्तेमाल सिर्फ क्रिकेट तक सीमित रहेगा या इन्हें मल्टी-स्पोर्ट वेन्यू बनाकर पूरे साल इस्तेमाल किया जा सकेगा। ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड इसका एक अच्छा उदाहरण हो सकता है, जहां क्रिकेट के साथ फुटबॉल, सॉकर और दूसरे बड़े खेलों का आयोजन होता है।
28 नए स्टेडियम, लेकिन पुराने मैदानों का क्या?
भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता जगजाहिर है। देश में पहले से ही कई बड़े क्रिकेट स्टेडियम मौजूद हैं। एक रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 30 स्टेडियम ऐसे हैं, जहां इंटरनेशनल क्रिकेट कराया जा सकता है। लेकिन इन मैदानों की एक बड़ी समस्या है—नियमित रूप से मैच न मिलना। कोलकाता के ईडन गार्डन्स से लेकर मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम जैसे बड़े मैदान भी इसी समस्या से जूझते नज़र आते हैं। ऐसे में जब देश के अलग-अलग हिस्सों में 28 नए स्टेडियम बनाए जा रहे हैं, तब सवाल सिर्फ इनके निर्माण का नहीं, बल्कि इनके इस्तेमाल और रखरखाव का भी उठता है।
स्टेडियम तो बन गए, लेकिन खर्च कौन उठाएगा?
एक बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाना आसान काम नहीं है। जमीन, निर्माण, सुविधाओं और सुरक्षा से लेकर इसके रखरखाव पर लगातार खर्च होता रहता है। अगर साल में चुनिंदा मुकाबले खेले जाएंगे, तो इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। यही वजह है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि जब क्रिकेट मैच नहीं हों तो इन स्टेडियमों का इस्तेमाल दूसरे खेलों के लिए क्यों नहीं किया जा सकता? भारत के सामने इस मामले में ऑस्ट्रेलिया का एमसीजी क्रिकेट स्टेडियम एक अच्छा उदाहरण हो सकता है।
एमसीजी सिर्फ क्रिकेट स्टेडियम नहीं
ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड यानी एमसीजी (MCG) दुनिया के सबसे प्रसिद्ध क्रिकेट मैदानों में शुमार है। लेकिन इसकी खासियत सिर्फ क्रिकेट नहीं है। दिसंबर 2025 में यहां टेस्ट मैच खेले जाने के बाद, मौसम और कैलेंडर के हिसाब से मैदान का इस्तेमाल फुटबॉल के लिए किया गया। क्रिकेट के लिए गोलाकार दिखने वाला मैदान जरूरत के मुताबिक फुटबॉल के लिए आयताकार मैदान में बदल दिया गया।
मैदान एक, खेल कई
ऑस्ट्रेलिया में बड़े स्टेडियमों को सालभर इस्तेमाल करने की योजना काफी समय पहले से बनाई जाती है। क्रिकेट के बाद ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल, फिर सॉकर, रग्बी, कॉन्सर्ट और दूसरे बड़े इवेंट्स के लिए मैदान का इस्तेमाल किया जाता है। एमसीजी में चार AFL क्लब अपने ज्यादातर घरेलू मुकाबले खेलते हैं। स्टेडियम हर साल कम से कम 45 AFL होम-एंड-अवे मुकाबलों की मेजबानी करता है। इसके अलावा फाइनल और दूसरे बड़े मुकाबले भी आयोजित किए जाते हैं। वहीं क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और क्रिकेट विक्टोरिया गर्मियों के दौरान करीब 30 दिनों तक एमसीजी का इस्तेमाल करते हैं।
क्रिकेट की पिच खराब होने का क्या?
क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों के आयोजन से क्रिकेट पिच खराब होने का सवाल स्वाभाविक है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने इसका भी समाधान निकाला है। कई बड़े स्टेडियमों में ड्रॉप-इन पिच का इस्तेमाल होता है। इन पिचों को जरूरत के मुताबिक मैदान में लगाया और हटाया जा सकता है। इससे फुटबॉल या दूसरे खेलों के दौरान क्रिकेट की पिच को सुरक्षित रखा जा सकता है। यानी मैदान एक और खेल कई।
ऑस्ट्रेलिया में पहले से तय होता है पूरा कैलेंडर
ऑस्ट्रेलिया का मॉडल सिर्फ तकनीक पर निर्भर नहीं है। इसके पीछे एक तय व्यवस्था भी है। विक्टोरिया में एमसीजी के इस्तेमाल को लेकर क्रिकेट विक्टोरिया और AFL विक्टोरिया के बीच औपचारिक व्यवस्था है। इसके तहत 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक फुटबॉल को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक क्रिकेट के मुकाबले खेले जाते है। इसका मतलब है कि स्टेडियम का इस्तेमाल आखिरी समय पर तय नहीं होता। अलग-अलग खेलों के सीजन और कार्यक्रम पहले से तय किए जाते हैं।
भारत में भी हो सकता है ऐसा मॉडल
भारत में भी कुछ बड़े क्रिकेट स्टेडियमों को मल्टी-स्पोर्ट वेन्यू के तौर पर विकसित किया जा सकता है। इससे स्टेडियम साल के ज्यादातर समय इस्तेमाल में रह सकते हैं और रखरखाव का खर्च निकालने में भी मदद मिल सकती है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक समय हॉकी मैच भी खेले गए थे। लेकिन इस तरह के इस्तेमाल को लेकर कोई स्थायी व्यवस्था आगे नहीं बढ़ सकी। यही सबसे बड़ा फर्क है। सिर्फ स्टेडियम बना देना काफी नहीं है। उसके इस्तेमाल की योजना भी बनानी जरुरी होगी।
सिर्फ क्रिकेट के भरोसे क्यों रहें?
भारत में कई बड़े और महंगे स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन्हें सिर्फ इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों के लिए इस्तेमाल होने वाले मैदान के तौर पर न देखा जाए। अगर फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स, कॉन्सर्ट और दूसरे बड़े आयोजनों के लिए भी इनका इस्तेमाल हो, तो स्टेडियम पूरे साल सक्रिय रह सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया का एमसीजी यह दिखाता है कि एक क्रिकेट स्टेडियम को जरूरत के मुताबिक कई खेलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में भी अगर निर्माण से पहले ही मल्टी-स्पोर्ट प्लानिंग की जाए, तो नए स्टेडियम सिर्फ क्रिकेट के इंतजार में खाली रहने के बजाय पूरे साल लोगों और खेलों के काम आ सकते हैं।