CEC Gyanesh Kumar News: गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR)प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ा विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद बवाल मचा है। SIR प्रक्रिया में ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसला लेने के आरोपों के बाद राज्यसभा में उनके खिलाफ लंबित महाभियोग का मुद्दा फिर गरमाया है। विपक्षी दलों ने फिर से इस मुद्दे को उठाया है। विपक्षी 73 सदस्यों ने 24 अप्रैल 2026 को राज्यसभा के सभापति को ज्ञानेश के खिलाफ महाभियोग का नोटिस सौंपा था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के पास नोटिस लंबित है, उसे खारिज नहीं किया गया है। माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। विपक्षी सांसदों ने इस संबंध में नोटिस दिया था। उसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नौ आरोप थे।
आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांगी अनुमति
इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर CEC के विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी मांगी है। वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी को लिखे पत्र में आयोग की निष्पक्षता पर उठाया। पत्र में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि CEC ने बहुसदस्यीय चुनाव आयोग को ऐसे चलाया, जैसे सारे फैसले केवल एक व्यक्ति ले रहा हो। इसे सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों ने दी गई व्यवस्था के भी खिलाफ बताया है। दरअसल, नियमों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में किसी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने से पहले अटॉर्नी जनरल या सॉलिसीटर जनरल से लिखित इजाजत लेनी होती है। वैसे, यह फिलहाल सिर्फ कार्यवाही शुरू करने की मांग है। अदालत का कोई आदेश नहीं है। अब इस पत्र पर अटॉर्नी जनरल का रुख अहम होगा।
2 आयुक्तों की 14 लिखित आपत्तियों का मामला क्या?
यह पूरा विवाद अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट के अनुसार ज्ञानेश कुमार, अन्य दो आयुक्तों की सहमति बिना फैसले लेते हैं। इस रिपोर्ट में आयोग के सदस्य सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की ओर से 10 महीनों में इसे लेकर 14 बार आपत्ति दर्ज कराने की बात कही गई है। डेटा बेस के केंद्रीकरण और SIR के दौरान वोटर का नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। फॉर्म-6 में बदलाव को दोनों आयुक्तों ने अनधिकृत बताया था। दोनों आयुक्तों ने आयोग के नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम ECINet पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस प्रशासनिक विवाद की शिकायत कैबिनेट सचिव से भी लिखित में की थी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मई से अगस्त के बीच 4 महीने पूरे चुनाव आयोग की औपचारिक बैठक नहीं हुई। वहीं, विवाद बढ़ने पर चुनाव आयोग ने सफाई भी दी है। आयोग ने कहा, SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे। आयोग ने कहा कि आंतरिक बैठकों में अलग-अलग राय या टिप्पणियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इन्हें आयोग में टूट या असहमति के रूप में नहीं देखना चाहिए।
राहुल और प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
इस मामले पर पूरा विपक्ष लामबंद है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग को हाईजैक करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा है कि हमें इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संविधान पर सीधा हमला बताते हुए देशद्रोह बताया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमलावर हैं।
संविधान पीठ सुनेगी CEC-EC नियुक्ति का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने बीते कल यानी 23 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को भेज दिया। दो जजों की पीठ का फैसला बंटने पर यह कदम उठाया गया।