BSP UP Election Candidates News : बहुजन समाज पार्टी (BSP) इन दिनों अपने अस्तित्व और भविष्य को बचाने के लिए कड़े संघर्ष के दौर से गुजर रही। एक तरफ जहां पार्टी के सामने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर पुराना राजनीतिक रसूख हासिल करने की भारी चुनौती है तो दूसरी तरफ पार्टी सुप्रीमो मायावती के पारिवारिक मोर्चे पर भी उथल-पुथल मची है। मायावती के समक्ष पार्टी की विरासत संभालने के लिए योग्य उत्तराधिकारी को चुनने के साथ बीएसपी संगठन को मजबूत बनाए रखने की दोहरी जिम्मेदारी है। वैसे, इन राजनीतिक एवं अंदरूनी संकटों से जूझकर भी BSP ने विधानसभा चुनाव के लिए 100 उम्मीदवार फाइनल किए हैं। इस मामले में बसपा सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दलों समेत सभी प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल गई है।
100 सीटों पर नाम तय, बनाए गए विधानसभा प्रभारी
बसपा ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सितंबर तक 100 प्रत्याशी तय करने के लक्ष्य को पूरा कर लिया है। वैसे, पार्टी द्वारा अभी इन नामों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने 100 सीटों के लिए चेहरे फाइनल किए जा चुके हैं। दिलचस्प बात है कि पार्टी इन तयशुदा उम्मीदवारों को सीधे तौर पर विधानसभा प्रत्याशी कहने के बदले विधानसभा प्रभारी बता रही। ये प्रभारी आगे चुनाव में पार्टी उम्मीदवार बनेंगे। अभी पार्टी जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन कर रही। इसी मंच से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इन प्रभारियों के नामों का ऐलान कर रहे। पार्टी का अगला लक्ष्य अगले डेढ़ महीने यानी 15 नवंबर तक 250 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय करने का है।
टिकट दावेदारों से वन-टू-वन कर रहीं मायावती
पार्टी प्रमुख मायावती लखनऊ स्थित अपने आवास पर टिकट के दावेदारों से लगातार वन-टू-वन मुलाकात कर रही हैं। हर एक उम्मीदवार के सियासी वजूद को बारीकी से परखने के बाद संबंधित जिले में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने के निर्देश दिए जा रहे। नाम तय होने के बावजूद उन्हें सार्वजनिक न करने की रणनीति अपनाई जा रही। इस रेस में केवल आजाद समाज पार्टी (ASP) ऐसी पार्टी है, जो मायावती के नक्शेकदम पर चलते हुए उनके पीछे-पीछे चल रही। चंद्रशेखर आजाद की इस पार्टी ने अब तक 42 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। उनका दावा है कि वे 87 सीटों पर नाम फाइनल कर चुके हैं। एएसपी भी इन्हें प्रभारी बता रही, जिसमें दलित वर्ग से सबसे ज्यादा 20, ओबीसी से 13 और मुस्लिम समुदाय से 9 उम्मीदवार हैं।
अन्य दलों में क्या चुनावी तैयारी की स्थिति?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च में संभावित है। अब चुनावों में बमुश्किल 4 महीने का वक्त बचा है। आधिकारिक तौर पर अब तक किसी प्रमुख राजनीतिक दल ने प्रत्याशियों की फाइनल लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन अंदरूनी तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रहीं।
समाजवादी पार्टी (SP) : सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने पूर्वांचल, पश्चिम और मध्य यूपी की 46 सीटों पर उम्मीदवार अंदरूनी तौर पर तय कर लिए हैं। इनकी आधिकारिक पहली सूची आने का इंतजार किया जा रहा है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर संशय : सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन का पेंच फंसा है। रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस चुनाव में 150-200 सीटों की मांग कर रही, जिस पर सपा इतनी बड़ी संख्या देने को तैयार नहीं दिख रही। वैसे, सियासी मजबूरी है कि दोनों दल अलग-अलग रहकर सफलता पा नहीं सकते। इस कारण माना जा रहा कि सीटों का सौदा चुनाव के मुहाने पर तय होगा।
एनडीए और जदयू की एंट्री : सत्ताधारी बीजेपी और उसके एनडीए सहयोगियों के बीच भी सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है। इस हलचल के बीच बिहार में बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी यूपी में 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी है। इससे भाजपा को अपने कुनबे में सीटों का तालमेल बिठाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
BJP जमीनी सर्वे बाद जारी करेगी उम्मीदवारों की सूची
भले BJP उम्मीदवारों की सूची बहुत सोच-विचार और जमीनी सर्वे के बाद काफी देर से जारी करे, लेकिन मैदान में वह पूरी ताकत से जुटी है। यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से मायावती ने अकेले एक-चौथाई यानी 100 सीटों पर मोहरे फिट कर दिए हैं। चुनाव से इतने महीने पहले नाम तय होने से इन प्रभारियों को जनता के बीच अपनी जमीन मजबूत करने का भरपूर समय मिल गया है। मौजूदा वक्त में उत्तर प्रदेश विधानसभा या विधान परिषद में बसपा का एक भी विधायक या एमएलसी नहीं है और संसद के दोनों सदनों में भी पार्टी का कोई नुमाइंदा नहीं है। ऐसे में यह चुनाव बहुजन समाज पार्टी और मायावती दोनों के लिए सीधे तौर पर वजूद की एक बड़ी लड़ाई बन चुका है।