जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत का सफर 85 पदकों के साथ समाप्त हुआ। भारतीय दल ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता के शुरुआती चरण में भारत को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, लेकिन आखिरी दो दिनों में खिलाड़ियों ने जबरदस्त वापसी की। इन दो दिनों में भारत ने 11 स्वर्ण पदक जीते, जिससे वह उज्बेकिस्तान को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंच गया। अंतिम दौर में हॉकी, क्रिकेट, कुश्ती, तीरंदाजी और गोल्फ में मिली जीत ने भारतीय अभियान को शानदार अंदाज में खत्म किया।

शुरुआत में गोल्ड के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार

एशियन गेम्स के शुरुआती दिनों में भारतीय दल के प्रदर्शन को लेकर कई सवाल उठने लगे थे। खासकर शूटिंग और एथलेटिक्स जैसे मजबूत खेलों में अपेक्षित संख्या में स्वर्ण पदक नहीं मिलने से भारत की पदक तालिका में स्थिति बहुत मजबूत नहीं हो पाई। पहले 12 दिनों में भारत के खाते में सिर्फ 10 स्वर्ण पदक आए थे। ऐसे में पदक तालिका में शीर्ष चार में जगह बनाना भी चुनौती बनता दिख रहा था। लेकिन प्रतियोगिता के अंतिम चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया और तस्वीर तेजी से बदल गई। शुक्रवार को भारत ने छह स्वर्ण पदक जीते, जबकि शनिवार को पांच और गोल्ड आए। सिर्फ दो दिनों में 11 स्वर्ण पदकों की इस तेजी ने भारत को पांचवें स्थान से चौथे स्थान तक पहुंचा दिया।

अंतिम दिन पांच गोल्ड ने बदल दी पदक तालिका

शनिवार भारत के लिए एशियन गेम्स का सबसे सफल दिन साबित हुआ। एक ही दिन देश को पांच अलग-अलग खेलों में स्वर्ण पदक मिले।अमन सहरावत ने कुश्ती में गोल्ड जीता, प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत गोल्फ में इतिहास रचा, भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को हराकर स्वर्ण पदक बरकरार रखा, कुमकुम मोहोद ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में ऐतिहासिक गोल्ड जीता और दिन का आखिरी स्वर्ण पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया को हराकर हासिल किया। इन पांच पदकों ने भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 18 से बढ़ाकर 21 कर दी। यही बदलाव भारत को उज्बेकिस्तान के बराबर ले आया और अधिक रजत पदकों के आधार पर भारतीय दल चौथे स्थान पर पहुंच गया।

हॉकी ने शानदार अंदाज में किया अभियान का अंत

भारत के लिए एशियन गेम्स का आखिरी स्वर्ण पदक पुरुष हॉकी टीम ने जीता। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने एशियन गेम्स में पुरुष हॉकी का खिताब बरकरार रखा। टीम ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन भी हासिल कर लिया। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाए रखा और फाइनल में भी मलेशिया को एकतरफा अंदाज में मात दी। महिला हॉकी टीम इससे पहले चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीत चुकी थी। इस तरह भारत ने एक ही एशियन गेम्स में पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमों के साथ गोल्ड जीतने का ऐतिहासिक कारनामा किया। महिला टीम का स्वर्ण 44 साल बाद आया था।

क्रिकेट में महिला और पुरुष दोनों टीमों ने जीता गोल्ड

क्रिकेट में भी भारत का अभियान बेहद सफल रहा। भारतीय महिला टीम ने पहले ही स्वर्ण पदक जीतकर अपना अभियान मजबूत कर दिया था। इसके बाद पुरुष टीम ने भी फाइनल में पाकिस्तान को हराकर गोल्ड अपने नाम किया। इस तरह भारत ने एशियन गेम्स में पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल किया। दोनों वर्गों में मिली जीत ने भारतीय क्रिकेट के महाद्वीपीय स्तर पर दबदबे को भी मजबूत किया। पुरुष टीम के गोल्ड के साथ भारत ने आखिरी दिन अपने स्वर्ण पदकों की संख्या को 21 तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

तीरंदाजी में भारत का सबसे बड़ा गोल्ड योगदान

अगर स्वर्ण पदकों की बात करें तो तीरंदाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में कुल पांच स्वर्ण पदक जीते।महिला और पुरुष कंपाउंड टीमों के अलावा मिश्रित कंपाउंड टीम और महिला रिकर्व टीम ने भी गोल्ड हासिल किया। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद की जीत की रही। कुमकुम ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उनकी जीत ने भारतीय तीरंदाजी के अभियान को एक खास पहचान दी।

प्रणवी उर्स ने गोल्फ में रचा इतिहास

महिला व्यक्तिगत गोल्फ में प्रणवी उर्स ने भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया। वह एशियन गेम्स में व्यक्तिगत गोल्फ में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। प्रणवी की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि भारतीय महिला गोल्फ लंबे समय से एशियाई स्तर पर मजबूत प्रदर्शन करती रही है, लेकिन व्यक्तिगत स्वर्ण पदक उसके खाते में नहीं आया था। इस बार प्रणवी ने उस इंतजार को खत्म कर दिया। भारत ने महिला टीम स्पर्धा में भी रजत पदक जीता, जिससे गोल्फ में उसका कुल पदक प्रदर्शन और मजबूत हुआ।

कुश्ती में अमन और सुजीत ने दिलाए गोल्ड

कुश्ती में भारत को दो स्वर्ण पदक मिले। अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड जीता, जबकि सुजीत ने 65 किलोग्राम वर्ग में भारत को स्वर्ण दिलाया। अमन की जीत विशेष रूप से ऐतिहासिक रही। उन्होंने फाइनल में उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन चोंग सोंग हान को 11-7 से हराया। वह एशियन गेम्स में पुरुषों के 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बने। सुजीत का गोल्ड भी लंबे इंतजार के बाद आया। भारत ने 2018 के बाद पहली बार एशियन गेम्स कुश्ती में पुरुष वर्ग के इन प्रमुख भार वर्गों में स्वर्ण हासिल किया।

बॉक्सिंग में तीन गोल्ड, लवलीना ने फिर रचा इतिहास

बॉक्सिंग में भारत को तीन स्वर्ण पदक मिले। लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। लवलीना एशियन गेम्स में बॉक्सिंग का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला बनीं। उनके अलावा परवीन हुड्डा और अंकुश पंघाल ने भी अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। बॉक्सिंग के इन तीन गोल्ड ने भारत की अंतिम पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अंतिम चरण में आए गोल्ड रश का हिस्सा बने।

शूटिंग में गोल्ड कम, लेकिन कुल पदक ज्यादा

शूटिंग में भारत को स्वर्ण पदकों की संख्या उतनी नहीं मिली जितनी पिछले एशियन गेम्स में उम्मीद की जा रही थी। इसके बावजूद यह भारत के सबसे ज्यादा पदक देने वाले खेलों में शामिल रहा। भारतीय निशानेबाजों ने कुल 15 पदक जीते, जिनमें तीन स्वर्ण, आठ रजत और चार कांस्य शामिल रहे। नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतकर लंबे इंतजार को खत्म किया। मिश्रित ट्रैप में नीरू और क्यनान चेनाई की जोड़ी ने भी गोल्ड हासिल किया।

एथलेटिक्स बना सबसे ज्यादा पदक देने वाला खेल

कुल पदकों के लिहाज से एथलेटिक्स भारत का सबसे सफल खेल रहा। भारतीय एथलीटों ने 24 पदक जीते। इनमें एक स्वर्ण, नौ रजत और 14 कांस्य पदक शामिल रहे। एथलेटिक्स में गोल्ड की संख्या कम रही, लेकिन कुल पदकों में इसके योगदान ने भारत की 85 पदकों की पूरी संख्या को मजबूत किया। शूटिंग के 15 पदकों के बाद एथलेटिक्स का प्रदर्शन भारत के अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रहा।

कबड्डी में भी दोनों टीमों का दबदबा

भारत ने पुरुष और महिला दोनों कबड्डी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस तरह क्रिकेट और हॉकी की तरह कबड्डी में भी दोनों भारतीय टीमों ने शीर्ष स्थान हासिल किया। दोनों वर्गों में मिली जीत ने भारत के पारंपरिक टीम खेलों में दबदबे को बरकरार रखा। एशियन गेम्स में कबड्डी लंबे समय से भारत की मजबूत स्पर्धाओं में रही है और इस बार भी खिलाड़ियों ने उस परंपरा को आगे बढ़ाया।

भारत के 85 पदकों का खेलवार ब्योरा

भारत ने एशियन गेम्स 2026 में कुल 21 खेलों में पदक हासिल किए। खेलवार प्रदर्शन में एथलेटिक्स 24 पदकों के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद शूटिंग ने 15 और तीरंदाजी ने नौ पदक दिलाए। बॉक्सिंग से छह, कुश्ती से छह और स्क्वैश से पांच पदक आए। नौकायन से तीन, गोल्फ से दो और क्रिकेट, हॉकी तथा कबड्डी से दो-दो स्वर्ण पदक मिले। भारत ने वेटलिफ्टिंग, वुशु, बैडमिंटन, कुराश, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, रोइंग, सेपकटकरॉ, सॉफ्ट टेनिस और टेबल टेनिस में भी पदक जीते।

पदक तालिका में चौथे स्थान पर भारत

भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य के साथ कुल 85 पदक जीते। चीन 169 स्वर्ण के साथ पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा। मेजबान जापान 83 स्वर्ण के साथ दूसरे और दक्षिण कोरिया 39 स्वर्ण के साथ तीसरे स्थान पर रहा। उज्बेकिस्तान ने भी 21 स्वर्ण पदक जीते, लेकिन भारत के 27 रजत पदकों की तुलना में उसके पास 25 सिल्वर थे। इसी वजह से भारत ने उसे पीछे छोड़ते हुए चौथा स्थान हासिल किया।

85 पदक, लेकिन 2023 के रिकॉर्ड से पीछे

कुल 85 पदकों का आंकड़ा भारत के लिए एशियन गेम्स इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा पदक प्रदर्शन है। इससे पहले 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे। हांगझोउ में भारत के खाते में 28 स्वर्ण आए थे, जबकि इस बार गोल्ड की संख्या 21 रही। यानी कुल पदकों और स्वर्ण पदकों दोनों के मामले में भारत अपने पिछले रिकॉर्ड से पीछे रहा, लेकिन चौथे स्थान पर रहने में कामयाब रहा।

अंतिम दो दिनों का गोल्ड रश बना अभियान की सबसे बड़ी कहानी

भारत के एशियन गेम्स अभियान की सबसे बड़ी कहानी उसका अंतिम चरण रहा। करीब दो सप्ताह तक स्वर्ण पदकों के लिए संघर्ष करने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने आखिरी दो दिनों में 11 गोल्ड जीतकर पूरी तस्वीर बदल दी। यह गोल्ड रश सिर्फ संख्या तक सीमित नहीं रहा। इन पदकों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां शामिल थीं—महिला व्यक्तिगत रिकर्व में कुमकुम मोहोद का गोल्ड, महिला गोल्फ में प्रणवी उर्स की ऐतिहासिक जीत, अमन सहरावत का 57 किलोग्राम कुश्ती में पहला भारतीय गोल्ड और पुरुष हॉकी टीम का लगातार खिताब जीतकर ओलंपिक टिकट हासिल करना। यही वजह रही कि भारत का एशियन गेम्स अभियान शुरुआत की अपेक्षाकृत धीमी गति के बावजूद एक मजबूत और यादगार फिनिश के साथ समाप्त हुआ। 85 पदकों के साथ चौथा स्थान भारतीय दल के लिए अंतिम आंकड़ा है, लेकिन इस अभियान में मिले ऐतिहासिक स्वर्ण पदक और 2028 ओलंपिक से जुड़े क्वालिफिकेशन इसे आने वाले वर्षों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।