Mayawati on EVM controversy : उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज के दो बड़े चेहरों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संस्थापक एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर राजनीतिक हमला बोला है। मायावती ने दावा किया कि चंद्रशेखर का नगीना क्षेत्र में कोई जनाधार नहीं था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बसपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में गड़बड़ी करवाकर उन्हें चुनाव जितवाया। मायावती के इस बयान के बाद चुनाव आयोग और वोटिंग प्रक्रिया को लेकर फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
नागरिक में वोट ट्रांसफर का संदेश पैदा न होना चाहिए
लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बसपा प्रमुख ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे चुनाव आयोग पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की नींव तभी मजबूत रह सकती है, जब हर मतदाता को इस बात का पूरा भरोसा हो कि उसने जिस उम्मीदवार या पार्टी के पक्ष में बटन दबाया है, उसका वोट उसी खाते में गिना गया है। नागरिक के मन में यह संदेह पैदा हो जाए कि उसका वोट कहीं और ट्रांसफर हो गया है तो इससे पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर जनता का विश्वास खत्म होने लगेगा।
ईवीएम को हैक या प्रभावित किया जा सकता है
मायावती ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि भारत में 5 दशकों तक मतपत्रों (बैलेट पेपर) के जरिए चुनाव कराए जाते रहे। उस दौर में मतदान के बाद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मतपत्रों की गिनती पारदर्शी तरीके से होती थी। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और ईवीएम की शुरुआत की गई, तब भाजपा ने भी इस मशीन पर गंभीर सवाल उठाए थे। उस समय भाजपा के नेताओं ने दावा किया था कि ईवीएम एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसकी चिप को हैक या प्रभावित किया जा सकता है। यहां तक कि इस विषय पर एक किताब भी प्रकाशित की गई थी। हालांकि, सत्ता में आने के बाद भाजपा ने इस व्यवस्था में सुधार करने या इसे हटाने के बजाय इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
दलित, अति-पिछड़ों में ईवीएम को लेकर अविश्वास
बसपा अध्यक्ष ने विशेष रूप से दलित, शोषित और अति-पिछड़े वर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि ईवीएम को लेकर इन समुदायों के भीतर भारी अविश्वास का माहौल है। लगातार उठ रहे सवालों के कारण पार्टी के कैडर और आम मतदाताओं में वोटिंग को लेकर उत्साह कम हो रहा है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है। उन्होंने याद दिलाया कि बसपा ने ईवीएम के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद ही मतदान केंद्रों पर VVPAT (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की व्यवस्था लागू की गई थी।
VVPAT पर भी जताया असंतोष
वैसे, मायावती ने VVPAT व्यवस्था पर भी असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मतगणना के दौरान VVPAT की पर्चियों का मिलान नहीं किया जाता। केवल कुछ चुनिंदा पर्चियों की गिनती करने से आम मतदाता का संदेह दूर नहीं होता। किसी भी मशीन में तकनीकी गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए चुनाव आयोग को ऐसी ठोस और पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे आम जनता को अपनी वोट की शुचिता पर पूरा भरोसा हो सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश के मुख्य विपक्षी दलों में चुनाव प्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए आयोग को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
भाजपा के इशारों पर काम कर रहे चंद्रशेखर
मायावती ने चंद्रशेखर पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वे पूरी तरह से भाजपा के राजनीतिक इशारों पर काम कर रहे हैं। वे युवाओं को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर, अधिकारियों के चक्कर लगवाकर और धरना-प्रदर्शनों में झोंककर उनका भविष्य अंधकार में डाल रहे हैं। मुकदमे दर्ज होने के बाद ये युवा अदालतों के चक्कर काटने पर मजबूर हो जाते हैं और उनका करियर बर्बाद हो जाता है। मायावती के इस आक्रामक बयान के कुछ ही घंटों बाद नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का पलटवार भी सामने आया। चंद्रशेखर ने बहुत ही सधे और सम्मानजनक लहजे में मायावती के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे मायावती का पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन आंदोलन की वरिष्ठ नेता के रूप में हमेशा सम्मान करते हैं, लेकिन नगीना लोकसभा सीट के 5.12 लाख से अधिक मतदाताओं के जनादेश को षड्यंत्र या धांधली से जोड़ना जनता के विवेक और लोकतंत्र का अपमान है।
क्या नगीना लोकसभा सीट पर चुनाव का गणित
नगीना के चुनावी गणित को देखें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी के सिंबल पर 5,12,552 वोट हासिल किए थे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के ओम कुमार को 1,51,473 वोटों के बड़े अंतर से हराया था, जहां उन्हें कुल मतदान का 51.19% वोट मिला था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को 1.02 लाख वोट मिले थे, जबकि बसपा उम्मीदवार सुरेंद्र पाल सिंह मात्र 13,272 वोटों पर सिमट गए थे। अपनी जीत का बचाव करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि नगीना की सम्मानित जनता ने उनके वर्षों के सड़क संघर्ष, बहुजन समाज के मुद्दों पर उठाई गई आवाज और मेहनत पर भरोसा जताकर उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि वे इस बात से खुश हैं कि जो लोग कभी उनका वजूद मानने से इनकार करते हुए पूछते थे कि कौन चंद्रशेखर?, आज वे भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) देश में एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभर चुकी है।
बैलेट पेपर पर चुनाव के पक्ष में हूं: चंद्रशेखर
ईवीएम के मुद्दे पर चंद्रशेखर ने मायावती के रुख का आंशिक समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता की मांग करना और मतपत्रों से चुनाव कराने की बात कहना हर नागरिक और राजनीतिक दल का लोकतांत्रिक अधिकार है। वे खुद भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पक्षधर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी राजनीति किसी व्यक्ति विशेष या नेता के विरोध पर टिकी नहीं है, बल्कि वे संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और शोषित वर्ग के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। अपने बयान के अंत में चंद्रशेखर ने मुस्कुराते हुए बसपा प्रमुख को उनकी पार्टी का सही नाम भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जल्दबाजी में उनकी पार्टी को आजाद समाजवादी पार्टी कह दिया था, जबकि मान्यवर कांशीराम के विचारों पर आधारित उनकी पार्टी का वास्तविक और पंजीकृत नाम आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) है। राजनीति में विचारधारा का मतभेद हो सकता है, लेकिन बहुजन समाज के आपसी भाईचारे और संवाद को हमेशा बनाए रखना चाहिए।