Political Donation Racket News : गुजरात में राजनीति और काले धन को सफेद करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। जिन पार्टियों को चुनाव में जनता ने पूरी तरह नकारा और जिनके हर उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई, वे कागजों पर हजारों करोड़ का चंदा बटोर रही थीं। आयकर विभाग की लंबी जांच के बाद अब गुजरात पुलिस की सीआईडी क्राइम ने इस पूरे खेल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने राज्य में सक्रिय तीन ऐसी गैर-मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड पार्टियों और उनके बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग 3 एफआईआर दर्ज की हैं। आरोप है कि इन राजनीतिक दलों ने 1870 करोड़ का फर्जी चंदा दिखाकर सरकारी खजाने को 560 करोड़ रुपए के टैक्स का चूना लगाया है।

कौन-सी पार्टियां और कैसे किया घोटाला?

चुनाव आयोग के मुताबिक तीनों राजनीतिक दल 2017 से लगातार चुनाव लड़ रहे हैं। मगर, इन्हें 0.01% वोट भी नहीं मिलते। असली खेल तो इन पार्टियों के बैंक खातों में चल रहा था।

भारतीय नेशनल जनता दल (BNJD) : इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम BNJD का है। इसने 56238 लोगों से 1143.85 करोड़ का चंदा मिलने का दावा किया। इसके जरिए सीधे-सीधे 343 करोड़ का टैक्स चुराया गया।

स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (SAP) : पार्टी ने कागजों पर 519 करोड़ रुपए का दान दिखाया और 155 करोड़ की टैक्स चोरी की।

गरीब कल्याण पार्टी (GKP) : इस पार्टी ने 206.76 करोड़ का फर्जी चंदा दिखाया और 62 करोड़ के टैक्स की हेराफेरी की। इससे जुड़ी कंपनियों के खातों में 1295 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध लेन-देन मिला है।

कैसे चलता था कैशबैक का सिंडिकेट?

आयकर कानून की धारा-80जीजीसी के तहत किसी भी रजिस्टर्ड राजनीतिक दल को दिया गया चंदा 100% टैक्स-फ्री होता है। इसी नियम का फायदा उठाकर यह फर्जीवाड़ा किया गया।

पैसा ट्रांसफर करना : बड़े-बड़े कारोबारी या दानदाता चेक या ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए इन पार्टियों के बैंक खातों में पैसा भेजते और टैक्स छूट का रसीद-प्रमाण ले लेते थे।

फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल : पैसा मिलते पार्टियां उसे अपने से जुड़ी फर्जी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर देती थीं।

फर्जी बिल और कैश वापसी : कागजों पर दिखाया जाता था कि पार्टी ने राशन या अन्य सामान खरीदा है। इसके बाद बैंकों से कैश निकाला जाता था।

कमीशनखोरी : पार्टियां और बिचौलिए 4 से 10% का अपना कमीशन काटते थे। बाकी बचा 90-96% पैसा असली दानदाता को चुपचाप कैश में लौटा दिया जाता था।

इस पूरे रैकेट में कुछ चार्टर्ड एकाउंटेंट की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उन्होंने बिना जांच-पड़ताल किए महज कुछ हजार रुपयों के लालच में फर्जी बैलेंस शीट पर मुहर लगाई।

आरोपियों पर कसता शिकंजा

सीआईडी क्राइम ने नए कानून की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। BNJD के मुखिया सुरेंद्र कुमार विष्णुभाई गजेरा को इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड माना जा रहा। उनके अलावा कई पार्टी अधिकारियों और सीए के नाम एफआईआर में शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सबूत बेहद पुख्ता हैं। आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज किए जा रहे हैं और उनकी संपत्तियों को बेचने पर रोक लगा दी गई है। आने वाले दिनों में अपराध की कमाई से बनाई गई संपत्तियों को जब्त किया जाएगा, ताकि ऐसे घोटालों पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सके।