अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज, 2 नवंबर को सुनवाई होगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर विचार करेगी। याचिकाओं में मंदिर ट्रस्ट के चंदे की कथित हेराफेरी की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच कराने के साथ-साथ वित्तीय रिकॉर्ड का व्यापक ऑडिट कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की सूची के मुताबिक, मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने होगी। याचिकाकर्ताओं में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद सुधाकर सिंह और हिंदू धर्म परिषद शामिल हैं।

SIT ने CCTV फुटेज में पकड़ीं चोरी की 105 घटनाएं

इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मंदिर के दान गिनने वाले कक्ष के CCTV फुटेज की जांच में नकदी को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आई हैं। जांच में आठ आरोपियों की पहचान की गई है। SIT ने कथित गबन की रकम और आरोपियों के बैंक खातों में मिले अस्पष्ट जमा की भी जांच की है। SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, कथित तौर पर चोरी की गई रकम से खरीदी गई चल और अचल संपत्तियों की भी पहचान की गई है। टीम ने मंदिर के कर्मचारियों, लेखा विभाग से जुड़े लोगों, बैंक अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए हैं।

21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई थी जांच रिपोर्ट

इस मामले में पिछली सुनवाई 21 सितंबर को हुई थी। उस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि SIT ने अपनी जांच काफी हद तक पूरी कर ली है और आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अदालत ने SIT की स्थिति रिपोर्ट पर गौर किया था और निर्देश दिया था कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद उसकी एक प्रति सुप्रीम कोर्ट को भी उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि जांच से जुड़े जरूरी मुद्दे उसके संज्ञान में लाए जा सकते हैं, ताकि संबंधित निचली अदालत कानून के मुताबिक उचित निर्देश दे सके।

पहले SIT के पुनर्गठन और फॉरेंसिक ऑडिटर का दिया गया था निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले उत्तर प्रदेश सरकार को जांच के लिए SIT का पुनर्गठन करने और निष्पक्ष, तेज तथा गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने को कहा था। पुनर्गठित टीम की अगुवाई पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. कर रहे हैं। इसमें अयोध्या के DIG सोमेन वर्मा और SSP डॉ. गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने पर भी जोर दिया था। अदालत के सामने याचिकाकर्ताओं ने दान और चढ़ावे का पारदर्शी हिसाब रखने, संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और ट्रस्ट के खातों का व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग रखी है।

चांदी और अन्य चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड की भी हुई जांच

SIT ने नकदी से जुड़ी घटनाओं के अलावा मंदिर में मिले कीमती चढ़ावों के रिकॉर्ड की भी जांच की है। टीम ने चांदी जैसी धातु के करीब 944.411 किलोग्राम रिकॉर्ड की पड़ताल की, जिसे ट्रस्ट ने पिघलाने के लिए सरकारी टकसाल से जुड़ी संस्था को भेजा था। इसके अलावा चांदी की ईंटों, हार, चरण पादुका और रामचरितमानस से जुड़े दान के दावों की भी जांच की गई। SIT ने अपनी रिपोर्ट में कुछ वस्तुओं के लिए रसीद उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया था। ऐसे 86 कीमती सामानों की पहचान कर उनका भौतिक सत्यापन भी किया गया। आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट जांच की प्रगति, आरोपपत्र और ट्रस्ट के दान-चढ़ावे के हिसाब में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर विचार कर सकता है।